अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

             अध्याय-VIII अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

​ विश्व व्यापार में भारत का योगदान मात्र 1% है। लेकिन विश्व अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

भारत में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का बदलता प्रारूप: 1950-51 में भारत का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मूल्य 1214 करोड़ रुपये था जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 4429762 करोड़ हो गया। इस तीव्र वृद्धि के प्रमुख कारण विनिर्माण में वृद्धि, सरकारी नीतियों, उदारीकरण, निजीकरण, बाजार की विविधता आदि प्रमुख हैं।

बाजार के बदलते निर्यात संगठन के बदलते रूप :-

     भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में कृषि तथा समवर्गी उत्पादों का हिस्सा घटा है, जबकि पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पादों में वृद्धि हुई है। अयस्क, खनिज व विनिर्मित वस्तुओं का हिस्सा 2009-10 से 2016-17 तक स्थिर रहा है। परन्तु परम्परागत वस्तुओं जैसे कॉफी, काजू, दलहन आदि में कमी आयी है, जिसका मुख्य कारण अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा है। 2016-17 में विनिर्माण मूल्य का भारत के निर्यात मूल्य में 73.6% योगदान रहा है।

भारत के आयात संगठन के बदलते प्रारूप :-

       भारत में 1950 व 60 के दशक में खाद्यान्न की कमी अनुभव की गई। अतः इस समय खाद्यान्न का आयात अधिक किया गया। लेकिन हरित क्रांति के बाद 1973 में आए ऊर्जा संकट को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थ, उर्वरक, मशीनों व रसायनों का आयात किया गया। पेट्रोलियम का केवल ईंधन के रूप में ही प्रयोग न होकर उद्योगों में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग होता है। घरेलू क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने भी आयात में वृद्धि की। अतः मशीनें, सोना, चाँदी, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ आदि का आयात होने लगा।

व्यापार की दिशा : अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को व्यापार की दिशा कहते हैं। भारत का उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में हिस्सेदारी को बढ़ाना है जिसके लिए उदारीकरण, आयात कर में कमी, विअनुज्ञप्ति (डी-लाइसेंसिंग) तथा उत्पाद के पेटेंट में बदलाव आदि उपाय अपनाये गए।


समुद्री पत्तन (अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार के रूप में):-

​ भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है, अतः इसकी लम्बी तट रेखा सस्ते जल परिवहन के लिए अनुकूल दशाएँ उपलब्ध करवाती है। भारत में प्राचीन काल से बन्दरगाहों का उपयोग किया जा रहा है।

​अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण पत्तनों को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रवेश द्वार कहा जाता है। भारत में पत्तनों का विकास अंग्रेजों के द्वारा किया गया था। वर्तमान में 12 बड़े व 200 छोटे बन्दरगाह हैं। प्रमुख बन्दरगाहों की नीतियाँ केन्द्र सरकार के द्वारा व छोटे बन्दरगाहों की नीतियाँ राज्य सरकार के द्वारा बनाई जाती हैं।

​आजादी के बाद भारत के दो प्रमुख बन्दरगाह — कराची (पाकिस्तान) व चटगाँव (पूर्वी पाकिस्तान/बांग्लादेश में) चले गए, जिसकी क्षतिपूर्ति के लिए पश्चिम में काण्डला व पूर्व में कोलकाता के पास डायमण्ड हार्बर (हल्दिया पत्तन) का विकास किया गया।

​पृष्ठ प्रदेश: बन्दरगाह का वह प्रभाव क्षेत्र जहाँ आयात व निर्यात की गई वस्तुओं का वितरण होता है, उसे पृष्ठ प्रदेश कहा जाता है।

​भारत के प्रमुख बन्दरगाह

​कांडला पत्तन :- यह पत्तन कच्छ की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है। इस पत्तन का विकास मुम्बई पत्तन के भार को कम करने के लिए किया गया था। यह बन्दरगाह पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पाद व उर्वरकों का परिवहन करता है। इसका पृष्ठ प्रदेश गुजरात व राजस्थान है।

मुम्बई पत्तन :- यह देश का सबसे बड़ा व प्राकृतिक बन्दरगाह है। यह पत्तन 20 km लंबा व 10 km चौड़ा है। इस पर 54 गोदियाँ व विशालतम टर्मिनल है। इसके द्वारा यूरोप, U.S.A., दक्षिण अमेरिका व भूमध्य सागरीय देशों के साथ व्यापार किया जाता है। इसका पृष्ठ प्रदेश महाराष्ट्र, गुजरात, MP, UP व राजस्थान है।

न्हावाशेवा पत्तन :- इसे जवाहरलाल नेहरू पत्तन भी कहा जाता है। इसका निर्माण मुम्बई पत्तन के दबाव को कम करने के लिए एक अनुषंगी पत्तन के रूप में किया गया। यह भारत का विशालतम कंटेनर बन्दरगाह है।

मार्मागाओ पत्तन :- यह बन्दरगाह गोवा में जुआरी नदमुख के मुहाने पर स्थित एक प्राकृतिक बन्दरगाह है। इसका विकास 1961 में जापान को लौह अयस्क निर्यात करने के लिए किया गया था। इसका पृष्ठ प्रदेश गोवा, कर्नाटक व महाराष्ट्र राज्य में है।

न्यू मंगलौर पत्तन :- यह बन्दरगाह कर्नाटक राज्य में स्थित है। इसका विकास लौह अयस्क का निर्यात, जूट, कॉफी, लुगदी, चाय, ग्रेनाइट पत्थर आदि के व्यापार के लिए किया गया था। इसका पृष्ठ प्रदेश कर्नाटक राज्य है।

कोच्ची बन्दरगाह :- यह एक प्राकृतिक बन्दरगाह है। यह वेम्बनाड कयाल के मुहाने पर स्थित है, जिसे 'अरब सागर की रानी' (Queen of Arabian Sea) के नाम से जाना जाता है। इस पत्तन को स्वेज मार्ग के समीप स्थित होने के कारण अधिक लाभ प्राप्त है। यह केरल, तमिलनाडु व कर्नाटक आदि राज्यों को सेवाएँ प्रदान करता है।

कोलकाता पत्तन :- यह पत्तन बंगाल की खाड़ी से 128 km स्थल की ओर हुगली नदी पर स्थित है। इसका विकास अंग्रेजों के द्वारा ब्रिटिशकालीन राजधानी कोलकाता के विकास व परिवहन के लिए किया गया था। यह पत्तन हुगली नदी द्वारा लाए गए गाद की समस्या से ग्रस्त है, अतः इसका परिवहन विशाखापट्टनम व पारादीप की तरफ स्थानांतरित हो गया। इसका पृष्ठ प्रदेश UP, बिहार, बंगाल, झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, नेपाल व भूटान है।

हल्दिया पत्तन :- यह कोलकाता से 105 km अंदर/नीचे स्थित है। इसका निर्माण कोलकाता के नौभार को कम करने के लिए किया गया था। यह बन्दरगाह लौह अयस्क, कोयला, पेट्रोलियम, सूती वस्त्र, उर्वरक आदि का परिवहन करता है।

पारादीप पत्तन :- यह पत्तन महानदी डेल्टा पर स्थित है। इसका पोताश्रय अधिक गहरा होने के कारण यह भारी वस्तुओं के परिवहन के अनुकूल है। यह लौह अयस्क का निर्यात करता है। इसके पृष्ठ प्रदेश में ओडिशा, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना राज्य को शामिल किया गया है।

विशाखापट्टनम बन्दरगाह :- इस पत्तन का निर्माण आन्ध्र प्रदेश में कठोर चट्टानों को काटकर नहर के द्वारा समुद्र से जोड़कर किया गया है। यह पत्तन अयस्क व पेट्रोलियम का परिवहन करता है। इसका पृष्ठ प्रदेश आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना है।

चेन्नई पत्तन :- यह भारत का प्राचीन व कृत्रिम पत्तन है। इसे 1859 में बनाया गया था। यह पत्तन विशाल पोतों के लिए अनुकूल नहीं है। इसका पृष्ठ प्रदेश तमिलनाडु व पुडुचेरी है।

एन्नोर पत्तन :- चेन्नई पत्तन के भार को कम करने के लिए इस बन्दरगाह का विकास चेन्नई से 25 km दूर किया गया है।

तुतीकोरिन बन्दरगाह :- इसका विकास भी चेन्नई पत्तन के भार को कम करने के लिए किया गया है। यह पत्तन कोयला, नमक, तेल, खाद्यान्न, रसायन व पेट्रोलियम का परिवहन करता है।

हवाई अड्डे

​विश्व व्यापार में वायु परिवहन का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके द्वारा लम्बी दूरी वाले, अधिक मूल्यवान व जल्द ही खराब होने वाले उत्पादों का कम समय में परिवहन किया जा सकता है।


​2016-17 के अनुसार भारत में कुल 25 अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे परिवहन की सुविधा उपलब्ध करवाते हैं:

1. ​दिल्ली                       2. ​मुम्बई                                  3. ​कोलकाता

4. ​चेन्नई                           5. ​बेंगलुरू                            6. ​हैदराबाद

7. ​अहमदाबाद        8. ​गोवा                                   9. ​जयपुर

10. ​गुवाहाटी (असम)                                           11. ​अमृतसर

12. ​तिरुवनन्तपुरम                                                    13. ​कोच्चि

14. ​कालीकट             15. ​कोयम्बटूर            16. ​मैंगलुरु

17. ​नागपुर                     18. ​पुणे                            19. ​लखनऊ

20. ​वाराणसी              21. ​चण्डीगढ़             22. ​पटना

23. ​भुवनेश्वर               24. ​इंदौर                          25. ​कन्नूर

26. ​विशाखापट्टनम                                                  27. ​श्रीनगर

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