पाठ - 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
- निरंकुशवाद:- ऐसी शासन व्यवस्था जिसकी सत्ता पर किसी भी प्रकार का कोई अंकुश न हो ऐसी सरकार को निरंकुश सरकार कहा जाता है। इस व्यवस्था में सरकार केन्द्रीकृत, सैन्य बल पर आधारित एवं दमनकारी होती है।
- कल्पनादर्श (यूटोपिया):- एक ऐसे समाज की कल्पना जो इतना आदर्श हो की उसका साकार होना असंभव हो तो उसे कल्पनादर्श कहा जाता है।
- जनमत संग्रह:- एक प्रत्यक्ष मतदान जिसके जरिए एक क्षेत्र के सभी लोगों को एक प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए पूछा जाता है, तो उसे जनमत संग्रह कहा जाता है।
- जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्र:- फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सॉर्यू ने 1848 में चार चित्रों की एक श्रृंखला में सपनों का संसार रचा जो उसके शब्दों में जनतांत्रिक एवं गणतंत्र से मिलकर बना था। जिसके एक चित्र में सभी उम्र, एवं सामाजिक वर्गों के स्त्री व पुरुष लंबी कतार में स्वतंत्रता की प्रतिमा की वंदना करते जा रहे हैं, फ्रांसीसी क्रांति के दौरान अनेक कलाकार ऐसी महिमा का रूप प्रदान किया करते थे। जिसके एक हाथ में ज्ञानोदय की मशाल एवं दूसरे में मनुष्य के अधिकारों का घोषणा पत्र था। प्रतिमा के सामने निरंकुश संस्थानों के अवशेष बिखरे हुए हैं। यह चित्र एक कल्पनादर्श है। जिसमें लोग विभिन्न राष्ट्रों में बंटे हुए हैं। तथा ऊपर स्वर्ग से ईसा मसीह, संत और फरिश्ते इस दृश्य पर अपनी नजर जमाए हुए हैं। 19 वीं सदी के दौरान राष्ट्रवाद एक ऐसी ताकत बनकर उभरा जिसमें यूरोप की राजनीति में परिवर्तन ला दिए। इन परिवर्तनों से यूरोप में वहां साम्राज्य के स्थान पर राष्ट्र राज्य का उदय हुआ।
- + राष्ट्र राज्य :- वह राज्य जहाँ लोग समान भाषा, इतिहास व संस्कृति से जुड़े हो उसे राष्ट्र राज्य कहा जाता है।
- 1. फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र के विचार :-
- राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांस की क्रान्ति के साथ प्रारंभ हुई। फ्रांस की क्रान्ति के कारण सत्ता राजतंत्र से निकलकर नागरिको के हाथ में आ गई। पितृभूमि एवं नागरिक जैसे विचार ने संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया जिससे संविधान में समान अधिकार प्राप्त हुए। इस क्रांति के बाद सत्ता लोगो के हाथ में आ गयी। तिरंगे को राष्ट्र ध्वज चुना गया। समान कानुन बनाए गए। व्यापार शुल्क समाप्त किया गया। शहीदो का गुणगान किया गया। फ्रेंच को राष्ट्रभाषा बनाया गया। इस्टेट जनरल के चुनाव सक्रिय नागरिको के द्वारा किया गया जिसका नाम बदलकर नेशनल एसेंबली कर दिया गया। क्रांतिकारियो ने यह घोषणा कर दी की फ्रांस का यह भाग्य है, और लक्ष्य है, कि वे यूरोप के लोगो के निरंकुश शासको से मुक्त रहे अंत में फ्रांस में राजनीतिक बदलाव हुए। जिसका फायदा उठाते हुए नेपोलियन फ्रांस का अध्यक्ष बना।
- * नेपोलियन :-
- नेपोलियन ने फ्रांस में जनतंत्र को समाप्त करके पुनः राजतंत्र की स्थापना की तथा 1804 में प्रशासन में अधिक तर्क संगत एवं कुशलता लाने के लिए क्रांतिकारी सिद्धांतो का समावेश किया जिसे नागरिक सहींता या नेपोलियन सहींता कहा जाता है, इस सहिंता में निम्न प्रावधान किये गए :-
- जन्म पर आधारित सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए।
- कानुन के समक्ष सभी को समान माना गया।
- सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित रखा गया।
- प्रशासनिक विभाजन को स्वतन्त्र बनाया गया।
- सामंती व्यवस्था को खत्म किया गया।
- भू-दासत्व एवं जगिरदारी शुल्क की समाप्ती की गयी,
- यातायात एवं आवागमन में सुधार किए गए।
- यूरोप मे राष्ट्रवाद का निर्माण :-
- 18 वीं सदी के यूरोप मे कोई राष्ट्र राज्य नही था। पूर्वी एंव मध्य यूरोप निरंकुश राजाओ के अधिन थे। इन क्षेत्रो मे विभिन्न तरह के लोग रहते थे जो अपने आप को एक सामूहिक पहचान या किसी समान संस्कृति का भागी-दार को नही मानते थे। यह अलग-2 भाषा बोलने वाले विभिन्न जातिय समूह के सदस्य थे जैसे:- ऑस्ट्रिया पर शासन करने वाले हैब्सबर्ग साम्राज्य मे जर्मन भाषा बोलने वाले लाम्बार्डी व वेनेशिया मे इतालती भाषा, हंगरी मे मैग्यार भाषा तथा गालिसिया मे पोलिस भाषा वाले अधिक थे।
- * राष्ट्रवाद और राष्ट्र-राज्य का विचार कैसे उभरा ?
- 1. कुलीन वर्ग और नया मध्यवर्ग [ कृषक वर्ग ] :-
- जमीन के मालिक कुलीन वर्ग यूरोप का सबसे प्रभुत्वशाली वर्ग था। यह लोग ग्रामीण इलाको मे जागीरदार एंव शहरो की हवेलियो के मालिक थे। यह लोग फ्रेन्च भाषा बोलते थे। इनके परिवार वैवाहिक बन्धनो से आपस मे जुड़े थे, कुलीन वर्ग संख्या की दृष्टि से छोटा समूह था।
- मध्यवर्ग जनसंख्या के अधिकांश लोग कृषक थे। पश्चिम मे अधिकांश जमीन पर किरायेदार एंव छोटे कास्तकार खेती करते थे जबकि पूर्वी एंव मध्य यूरोप मे भूमि विशाल जागीरदारो मे बंटी थी जिस पर भू-दास खेती करते थे।
- पश्चिम एवं मध्य यूरोप के भागो मे औद्योगिक उत्पादन एंव व्यापार मे वृद्धिशील एंव शहरो व वाणिज्य वर्गो का उदय हुआ। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप नये सामाजिक समूह अस्तित्व मे आये, इन समूहो का आकार 19 वी सदी तक छोटा रहा था। कुलिन के विशेषाधिकारो की समाप्ती के बाद शिक्षित एवं उदारवादी मध्य वर्गो के बीच राष्ट्रीय एकता के विचार लोक प्रिय हुए।
- राजनीतिक क्षेत्र मे उदारवाद
- * उदारवादी राष्ट्रवाद के क्या मायने है? :-
- उदारवाद शब्द अंग्रेजी भाषा के (Liberalism) का हिन्दी पर्याय है। (Liberalism) शब्द लेटिन भाषा के मुल शब्द Liber से बना है, जिसका अर्थ आजाद होता है। नए मध्य वर्ग के लिए उदारवाद का अर्थ व्यक्टित के लिए आजादी तथा कानुन के समक्ष समानता था। यह सबकी सहमती से बनी सरकार पर बल देती है।
- फ्रांस कि क्रान्ति के बाद से निरंकुश व पादरी वर्ग के अधिकार समाप्त हुए तथा उदारवाद सविंधान व संसदीय प्रतिनिधि सरकार का पक्ष दल बना। 19 वी सदी मे उदारवादी निजि सम्पत्ति के स्वामित्व कि अनिवार्यता पर बल देते थे। सम्पति विहिन व महिलाओ को मतदान का अधिकार नही था। नेपोलियन सहिंता मे महिलाओ को वयस्क का दर्जा देते हुए पिता व पती के अधिन कर दिया गया।
- तथा 39 राज्यो का एक महासंघ बनाया जिसमे प्रत्येक कि अपनी मुद्रा व नापतोल की प्रणाली थी। हेल्सबर्ग से न्यूरेम्बर्ग के बिच सीमा शुल्क से गुजरना पड़ता था तथा प्रत्येक बार 5% कर चुकाना होता था। कपड़े को मापने का पैमाना "ऐल" था जिसकी लम्बाई क्षेत्र के साथ बदलती रहती थी। जैसे:-
- फ्रेक फर्ट मे 54.7 cm = 1{ ऐले}
- मेज मे 55.1cm = 1{ ऐले}
- न्यूरेम्बर्ग मे 65.6cm = 1{ ऐले}
- 1834 मे प्रशा कि पहल पर एक शुल्क संघ जॉलवेराईन का गठन किया गया, जिसमे अधिकांश जर्मन राज्य शामिल थे। इस संघ ने शुल्क अवरोधो को समाप्त कर दिया तथा मुद्रा कि संख्या घटाकर दो कर दी।
- * 1815 के बाद नया रूढ़ीवाद:-
- यह एक ऐसा राजनीतिक दर्शन है जो प्राचीन संस्थाओ राजतन्त्र एंव रिवाज पर बल देता है, तथा यह लोग तेजी से बदलाव की अपेक्षा धीमि गति से विकास को प्राथमिकता देते है।
- 1815 मे ब्रिटेन, रूस, आस्ट्रीया एवं प्रसा जैसी शक्तियो ने मिलकर नेपोलियन को हराया, इसके प्रतिनिधि यूरोप के लिए एक समझौता तैयार करने हेतु वियना मे मिले। इस सम्मेलन कि मेजमानी आस्ट्रिया के चांसलर डयुक मेटरनिख ने की थी। 1815 की इस सन्धि का उद्देश्य नेपोलियाई युद्ध के दौरान हुए बदलाव को खत्म करना था।
- वियना सन्धि कि शर्ते:-
- इस सन्धि के बाद बूर्बो राजवंश को सत्ता मे लाया गया।
- फ्रांस ने उन इलाको को खो दिया जिन पर नेपोलियन ने कब्जा किया था।
- उत्तर मे नीदरलैण्ड का राज्य स्थापित किया गया।
- दक्षिण मे पिडमाउण्ट मे जेनेवा जोड़ा गया।
- प्रशा को पश्चिमी सीमा का तथा आस्ट्रिया को उत्तरी इटली का नियंत्रण सौपा गया।
- रूस को पोलैण्ड दिया गया।
- नेपोलियन ने जो 39 राज्यो का जर्मन महासंघ बनाया था उसे बरकरार रखा गया।
- उन गतिविधियों को दबाया गया जो सरकार की वैधता पर सवाल उठाते हैं।
- अखबारों, किताबों व नाटको, कहानियों पर नियंत्रण के लिए सेंसर शिप के नियम लगाए गए।
- * क्रान्तिकारी:- अनेक यूरोपीय राज्यो मे क्रान्तिधारीयो को प्रशिक्षण देने एंव विचारों का प्रसार करने के लिए अनेक गुप्त संगठन उभरे इस समय क्रान्ति कारी का मतलब उस राजतंत्र का विरोधक करना था जिसकी स्थापना वियना सन्धि के तहत कि गयी थी। साथ ही स्वतन्त्रता एंव मुक्ति के लिए प्रतिबद्ध होना एंव संघर्ष करना क्रान्ति कारी होने के लिए जरूरी था।
- * ज्युसेप मेत्सिनी:- ज्युसेप मेत्सिनी का जन्म सन 1807 ई. मे जेनोआ मे हुआ यह कार्बोनरी नामक गुप्त संगठन से सदस्य बने 24 वर्ष कि आयु मे लिगुरिया क्रांति के लिए इन्हें बहिस्कृत कर दिया गया उन्होंने दो भूमि गत संगठन मर्सई मे यंग इटली तथा बर्न मे- यंग यूरोप का गठन किया। इनका मानना था कि इश्वर कि मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मानव कि प्राकृृति इकाई थी। अतः इटली छोटा राज्य एंव प्रदेश नही रह सकता उसे जोड़कर एक गणतंत्र बनाना है। मेत्सिनी ने राजतंत्र का विरोध करके प्रजा तांत्रिक गणतंत्र के सपनो से रूढ़ी वादीयो को हरा (दिला) दिया। मेटरनिख ने उसे हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन बताया।
- * क्रान्ति कारी युग 1830 से 1848:- इस समय युरोप के अनेक क्षेत्रो मे उदारवाद एंव राष्ट्रवाद को क्रान्ति के साथ जोड़कर देखा जाने लगा इटली व जर्मनी के राज्य ओटोमन साम्राज्य आयर लैण्ड व पोलैण्ड ऐसे ही क्षेत्र थे। इन क्रान्तियो का नेतृत्व, उदारवादी व राष्ट्रवादीयो ने किया जिनमे शिक्षक (अध्यापक वलर्ग प्रोफेसर) एवं मध्यम वर्ग शामिल था।
- * जुलाई क्रान्ति 1830:- फ्रांस मे प्रथम विद्रोह जुलाई 1830 मे हुआ बुर्बो राजा जिसे 1815 के बाद सत्ता मिली थी उसे क्रान्ति कारीयो ने हटा दिया तथा लुई फिलिप की अध्यक्षता मे संवैधानिक राजतंत्र कि स्थापना की मेटरनिख ने लिखा था "जब फ्रांस छींकता है, तो बाकी यूरोप को सर्दी जुखाम हो जाता है।" इस जुलाई क्रान्ति से ब्रुसेल्स मे विद्रोह बढ़ गया। जिससे वह युनाईटेड किंग डम ऑफ द नीदरलैण्ड से अलग हो गया।
- यूनान क्रान्ति :- 18 वीं सदी से यूनान ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। यूनान की आजादी के लिए 1821 में संघर्ष शुरू हुआ। अनेक कवियों एवं कलाकारों ने यूनान को यूरोपिय सभ्यता का पालना बताकर प्रशंसा की तथा स्वतंत्रता के लिए विद्रोह किए। कवि लॉर्ड बायरन ने युद्ध के लिए धन एकत्र किया लेकिन 1824 में बुखार से उनकी मृत्यु हो गयी। अंत में 1832 में कुस्तुनतुनिया सन्धि ने यूनान को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी।
- * रूमानी कल्पना एंव राष्ट्रीय भावना :- राष्ट्रवाद का विचार केवल युद्ध एंव क्षेत्रिय विस्तार से नही हुआ बल्कि इसमें संस्कृति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कला, काव्य, कहानी, नाटक आदि ने राष्ट्रीय भावना को व्यक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- * रूमानीवाद :- यह एक ऐसा सांस्कृतिक आन्दोलन था जो एक विशेष राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था। सामान्यतः रूमानी कवियों एवं कलाकारों ने तर्क वितर्क एंव विज्ञान के महिमा मण्डन की आलोचना की तथा अन्तर दृष्टि एंव भावनाओं पर बल दिया। जर्मन विचारक योहान गॉटफ्रीट जैसे विद्वानों ने दावा किया कि सच्ची जर्मन संस्कृति जर्मनी के आम लोगों में निहित है, तथा राष्ट्र की सच्ची आत्मा लोक गीतों, काव्यों व लोक नृत्यों में प्रकट होती है। अतः संस्कृति का स्वरूप राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।
- 19 वीं सदी के अंत में रूस, प्रसा व आस्ट्रीया जैसी बड़ी शक्तियों ने विभाजन कर दिया था। पोलैण्ड अब स्वतंत्र राज्य नही था। लेकिन संगीत एंव भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय भावना को जीवीत रखा गया। मसलन, करोल कूर्पिस्की ने संगीत एंव लोक नाट्यों के माध्यम से संघर्ष का गुणगान किया पोलेनेज़ एंव माजूरका ने लोक नृत्यों को राष्ट्रीय प्रतिकों में बदला। रूसी कब्जे के बाद स्कूलों में पोलिश के स्थान पर रूसी भाषा थोपी गई। रूस के विरुद्ध 1831 के विद्रोह को कुचल दिया गया। चर्च एवं धार्मिक शिक्षा में पोलिश भाषा का प्रयोग किया गया अतः पादरियों एवं बिशपों को साईबेरिया की जेल में भेज दिया गया।
- * भू-कठिनाइयाँ एवं जन विद्रोह:- 1830 का दशक यूरोप में अनेक कठिनाइयाँ लेकर आया। 19वीं सदी के आरम्भ में जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी बढ़ी। लघु उद्योगों को इंग्लैण्ड में मशीनों से बने कपड़ों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती थी। यह कपड़े मशीन के द्वारा निर्मित होने के कारण सस्ते होते थे। सामन्ती शुल्क, अनाज की कीमतों में वृद्धि, फसल के खराब होने आदि के कारण गरीबी बढ़ जाती है। 1845 में सिलेसिया में बुनकरों ने ठेकेदार के खिलाफ विद्रोह कर दिया जो उन्हें कच्चा माल देकर कपड़े बनवाते थे जिसकी कीमत कम देते थे। 4 जून 1845 को दोपहर दो बजे बुनकरों की भीड़ ठेकेदार की कोठी पहुँची तथा अधिक मजदूरी की माँग की एवं तोड़-फोड़ हुई थी। इस टकराव के कारण बुनकरों पर गोली चलाई गयी। 1848 में खाद्यान्न की कमी एवं बेरोजगारी के कारण पेरिस के लोग सड़कों पर उतर गए अतः लुई फिलिप को मजबूरन भागना पड़ा।
- * उदारवादियों की क्रान्ति (1848):-
- 1848 में गरीबी, बेरोजगारी एवं भुखमरी से पीड़ित किसानों व मजदूरों ने विद्रोह कर दिया। अतः राजा को छोड़कर भागना पड़ा तथा पुरुष मताधिकार एवं गणतंत्र की घोषणा करनी पड़ी। संविधान प्रेस एवं संगठन बनाने की स्वतंत्रता तथा संसदीय सिद्धांतों पर आधारित था। जर्मन इलाकों में राजनीतिक संगठनों ने फ्रैंकफर्ट शहर में एक सर्व जर्मन नेशनल असेंबली के पक्ष में मतदान का फैसला लिया। 14 मई 1848 को 831 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने फ्रैंकफर्ट संसद में अपना स्थान ग्रहण किया। यह संसद सेंट पॉल चर्च में आयोजित हुई।जिसमें जर्मन राष्ट्र के लिए जर्मन संविधान का प्रारूप तैयार किया गया। राष्ट्र की अध्यक्षता ऐसे राजा को सौंपी गयी जो संसद के अधिन होगा। प्रशा के राजा फ्रेडरिख विल्हेम चतुर्थ ने ताज पहनने से मना कर दिया तथा उन राज्यों का साथ दिया जो निर्वाचित सभा के विरोधी थे। संसद में मध्य वर्गों का प्रभाव अधिक था जिन्होंने मजदुरो कि माँगो का विरोध किया। जिससे वे उनका समर्थन खो बैठे। अन्त में सैनिको को बुलाया गया तथा असेंबली भंग कि गयी तथा हेब्सवर्ग के शासकों ने हेन्द्री के लोगों को स्वतंत्रताओं प्रदान की।
- जर्मनी:- 1848 में युरोप में राष्ट्रवाद का जनतंत्र एंव क्रान्ति से अलगाव बढ़ने लगा। जिससे इटली एंव जर्मनी एकत्रित होकर राष्ट्र राज्य बने। राष्ट्रवादी भावनाएं मध्य वर्गी लोगों में होने के कारण 1848 में जर्मन महा संघ के क्षेत्रो को जोड़कर एक निर्वाचित संसद के द्वारा शासीत राष्ट्र राज्य बनाने का प्रयास किया गया। लेकिन राजशाही सैन्य ताकत ने इसे दबा दिया। प्रशा के भूमि मालिकों ने समर्थन किया तथा एक एकीकरण के आन्दोलन का नेतृत्व संभाला। इस प्रक्रिया के प्रमुख जनक मंत्री ओटोमन विस्मार्क ने प्रशा की सेना एंव नोकर साही की सहायता ली। 7 वर्षों के दौरान आस्ट्रीया, फ्रांस डेनमार्क के युद्ध में प्रशा कि जीत हुई एंव एकीकरण की प्रक्रिया पूर्ण हुई। 18 जनवरी 1871 वर्साय समारोह में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।
- *इटली:- इटली अनेक वंशानुगत राज्य एंव बहु राष्ट्रीय हेब्सवर्ग साम्राज्य 19वी सदी के मध्य में इटली सात राज्यों में बटा था जिससे एक क्षेत्र सार्डिनिया पिडमार्ड में एक इतालवी राज घराने का शासन था 1830 के दशक में ज्युसेप मेत्सिनी ने इटली के एकीकरण के लिए विद्रोह किया। तथा यंग इटली नामक गुप्त संगठन कि स्थापना की। 1831 व 1848 में विद्रोह कि असफलता के कारण इतालवी राज्यों के एकिकरण कि जिम्मेदारी विक्टर इमैनुअल-II पर आ गयी। अभिजात वर्ग थी इटली का एकीकरण चाहता था। मंत्री प्रमुख कावूर ने इटली के प्रदेशों को एकीकृत करने वाले आन्दोलन का नेतृत्व किया। कावूर कि वजह से 1859 में सार्डिनिया पिडमार्ड आस्ट्रीयाई सेना को हराने में कामयाब हुआ। नियमित सैनिकों के अलावा गेरीबाल्डी के नेतृत्व में अनेक सहसस्त्र सेवकों ने इस युद्ध में भाग लिया। यह 1860 में दक्षिणी इटली व सिसिलियों के राज्यों में प्रवेश कर गया और स्पैनिश शासकों को हटाने के लिए किसानों को समर्थन पाने मे सफल रहा। तथा (1861) 1861 में विक्टर इमैनुअल-II को इटली का सम्राट घोषित कर दिया गया।
- *ब्रिटेन की अजीब दास्ताँ:- 18वी सदी से पहले ब्रितानी राष्ट्र नही था ब्रितानी सामुह पर रहने वाले लोगों, अंग्रेज, (ब) वेल्स, स्काट व आरहल कि मुख्य पहचान नृजातीय थी। लेकिन आंग्ल राष्ट्र की धन दौलत अहमियत एंव सत्ता मे वृद्धि के कारण यह छोटे राष्ट्रों पर प्रभुत्व बढाने मे सफल रहा। एक लम्बे संघर्ष के बाद आंग्ल संसद ने 1688 मे राजतंत्र से सत्ता छीन ली जिसका मुख्य केन्द्र इंग्लेण्ड था। इंग्लेण्ड एंव स्काटलेण्ड के बिच एक्ट ऑफ युनियन 1707 से युनाइटेड किंगडम ग्रेट ब्रिटेन का गठन हुआ। इसके बाद स्काटलेण्ड कि संस्कृति एवं राजनैतिक संस्थाओ को दबाया गया। इस समय आयरलैण्ड भी कैथलिक व प्रोटेस्टेट धार्मिक गुटों में बटा हुआ था अतः अंग्रेजों को अपना प्रभुत्व स्थापित करने मे आसानी हुई। अंत मे 1801 मे आयरलैण्ड को यूनाईटेड किंगडम मे मिला लिया गया। नए ब्रिटेन के प्रति चिन्ह ब्रितानी झण्डा (युनीयन जैक) व राष्ट्रगान (गोड सेव अवर नोवल किंग) को बढ़ावा दिया गया।
- राष्ट्र कि दृश्य कल्पना:- 18 वीं व 19 वीं शताब्दी में अनेक कलाकारों ने देश को एक नारी के रूप में प्रस्तुत किया अर्थात् नारी कि छवि राष्ट्र का रूपक बन गयी। आम तौर पर ऐसी महिला के रूप में व्यक्त किया जाता था। जिसकी आँख पर पट्टी बंधी हो और वह तराजू लिए हुए हो। फ्रांस में उसे लोक प्रिय ईसाई नाम "मारीआन" दिया गया जिसने जन राष्ट्र के विचार को रेखांकित किया। जैसे:- जर्मनी में जर्मेनिया बलूत वृक्ष के पत्तों का मुकुट पहनती है, भारत में भारत माता।
- बाल्कन मैं राष्ट्रवादी तनाव /राष्ट्रवाद एवं साम्राज्यवाद:- यूरोप में 1871 के बाद राष्ट्रवादी तनाव का मुख्य स्रोत बाल्कन क्षेत्र था। जिसमें वर्तमान में रोमानीया, बल्गारीया, अल्बेनिया, यूनान, मेसिडोनिया, क्रोएशिया, बोस्निया, हर्जेगोविना, सरबिया, स्लोवेनिया व मोन्टीनीग्रो शामिल थे। यहाँ के लोगों को स्लाव कहा जाता था। बाल्कन का एक हिस्सा ओटोमन के नियंत्रण में था। सभी बाल्कन राज्य अपनी सिमा बढ़ाना चाहते थे। रूस, जर्मनी, इंग्लैण्ड, हंगरी आदि थी। बाल्कन पर अपना प्रभाव चाहते थे। जिससे इस क्षेत्र में अनेक युद्ध हुए एवं अंत में प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हुआ।
- 1914 में राष्ट्रवाद साम्राज्यवाद से जुड़कर यूरोप को महाविपदा में ले गया। इस बिच विश्व के अनेक (देने) देशों ने जिनका 19 वीं सदी में यूरोपिय शक्तियों ने उपनिवेशी करण किया था। वो साम्राज्यवादी प्रभुत्व का विरोध करने लगे। इसका अर्थ यह है, कि राष्ट्रवादी थे जो स्वतंत्र राज्य निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे थे।
- अन्स्टे रेनन:- फ्रांसीसी विचार रेनन ने 1882 में सोरबान विश्वविद्यालय में एक व्याख्यान में "राष्ट्र कि अपनी समझ" को प्रस्तुत किया। यह व्याख्यान एक निबंध (मे इसा) के रूप में "राष्ट्र क्या है?" नामक शीर्षक से छपा। इस निबंध में इस बात कि आलोचना कि जाती है कि राष्ट्र समाज, भाषा, क्षेत्र व धर्म से बनता है। राष्ट्र लंबे प्रयास, त्याग एवं निष्ठा का चरम बिन्दु होता है। राष्ट्र एक व्यापक एकता है। जिसका अस्तित्व जनमत संग्रह है। राष्ट्र का अस्तित्व भी जरूरी है, अगर दुनिया में एक कानून एक शासक होगा तो स्वतंत्रता का लोप हो जाएगा।
- रूढ़िवाद:- ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परम्परा एवं रिवाजों पर बल देता है, तथा तीव्र विकास के स्थान पर क्रमिक विकास पर बल देता है। उसे रूढ़िवाद कहते हैं।
- ग्रिम बन्धु:- जेकब ग्रिम एवं विल्हेम ग्रिम का जन्म 1785 व 1786 में जर्मनी के हनाऊ शहर में हुआ था। यह दोनों भाई लोक कथाओं का संग्रह किया करते थे। इनका पहला संग्रह 1812 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद 33 खंडों में जर्मन भाषा का शब्द कोष प्रकाशित करवाया। यह फ्रांस के वर्चस्व को जर्मनी के लिए खतरा मानते थे।
- * नृजातीय:- एक साझा नस्ल, जनजाति, संस्कृति या पृष्ठभूमि वाला समुदाय जिसे कोई समुदाय अपनी पहचान मानता है, तो उसे नृजातीय कहा जाता है।
- * रूपक:- किसी अमूर्त विचार को किसी व्यक्ति या वस्तु के माध्यम से व्यक्त किया जाए तो उसे रूपक कहते हैं।
- रूपक के प्रकार:- (1) शाब्दिक रूपक (2) प्रतीकात्मक रूपक
- प्रमुख प्रतीक और उनके अर्थ:
- ① टूटी हुई बेड़ियाँ ⟶ आजादी
- ② बाज छाप कवच ⟶ जर्मन साम्राज्य की प्रतीक शक्ति
- ③ बलूत पत्तियों का मुकुट ⟶ बहादुरी
- ④ तलवार ⟶ मुकाबले की तैयारी
- ⑤ तलवार पर लिपटी जैतून की डाली ⟶ शांति की चाह
- ⑥ उगते सूर्य की किरणें ⟶ नए युग का सूत्रपात
- ⑦ काला, लाल और सुनहरा तिरंगा ⟶ उदारवादियों का झंडा
- ज्यूसेपे गैरीबाल्डी (1807 - 1882): यह इटली के स्वतंत्रता सेनानी थे। इनका परिवार तटीय व्यापार से जुड़ा था और यह स्वयं नौसेना में एक नाविक थे1833 मे मेत्सिनी (मात्सिनी) से मिलने के बाद ये 'यंग इटली' आंदोलन से जुड़े। 1854 मे इन्होंने विक्टर इमैनुएल का समर्थन किया, जो इतालवी राज्यों को एकीकृत करने का प्रयास कर रहे थे। 1860 मे गैरीबाल्डी के नेतृत्व में सेना पेपल (Papal) राज्यों से लड़ने रोम गई, जहाँ उन्होंने फ्रांसीसी सेना और रेड शर्ट्स (Red Shirts) का सामना किया। 1870:मे प्रशा युद्ध के दौरान फ्रांस ने रोम से अपनी सेना हटा ली, जिसके बाद पेपल राज्य इटली में शामिल हो सका। इस प्रकार इटली के एकीकरण में ज्यूसेपे गैरीबाल्डी का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- काउंट कैमिलो दे काबुर :- काउंट कैमिलो दे काबूरपीडमोंट-सारडीनिया राज्य के प्रमुख मंत्री (प्रधानमंत्री) थे। वे न तो कोई क्रांतिकारी थे और न ही जनतंत्र (लोकतंत्र) में विश्वास रखने वाले थे। इसके बावजूद उन्होंने इटली के एकीकरण के आंदोलन का नेतृत्व किया। काबूर इतालवी भाषा से कहीं बेहतर फ्रेंच भाषा बोलते थे। उन्होंने अपनी इसी वाकपटुता और चतुर कूटनीति से फ्रांस के साथ पीडमोंट-सारडीनिया की एक गुप्त संधि (गठबंधन) करवाई। फ्रांस के साथ किए गए इस चतुर कूटनीतिक गठबंधन के कारण ही पीडमोंट-सारडीनिया 1859 में ऑस्ट्रियाई बलों को हराने में कामयाब रहा। ऑस्ट्रिया की इस हार के बाद इटली का उत्तरी भाग (मुख्यतः लोम्बार्डी) पीडमोंट-सारडीनिया के साथ जुड़ गया और एकीकरण का पहला बड़ा चरण पूरा हुआ। काबूर ने दक्षिण में ज्यूसेपे गैरीबाल्डी के अभियानों का सही राजनीतिक लाभ उठाया, जिससे अंततः दक्षिण इटली और दो सिसलियों के राज्य भी राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय के अधीन आ सके। काबूर ने बिना किसी बड़ी क्रांति के, केवल अपनी बेहतरीन कूटनीति और फ्रांस के साथ दोस्ती के दम पर ऑस्ट्रिया को परास्त किया और इटली के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।
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