अध्याय - 4: कृषि
कृषि: फसल का उत्पादन करना कृषि कहलाता है। कृषि एक प्राथमिक क्रिया है, जिसके द्वारा मुख्यतः खाद्यान्न, चाय, कॉफी, मसाले आदि उत्पादित करते हैं। भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाला देश है, क्योंकि भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि करती है।
कृषि के प्रकार
1. प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि
जीवन गुजारने के लिए भूमि के छोटे टुकड़े पर प्राचीन उपकरणों की सहायता से यह कृषि करते हैं। इसमें परिवार के सदस्य ही कार्य करते हैं।
इसमें वनों को काटकर, जलाकर भूमि को साफ करके कृषि की जाती है। दो या तीन वर्षों के बाद यह भूमि अनुपजाऊ हो जाती है, तो नए स्थान पर इसी प्रकार से कृषि की जाती है, जिसे स्थानान्तरित कृषि कहते हैं।
इस कृषि को विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। सामान्यतः इसे "कर्तन, दहन, स्लैश तथा बर्न" के नाम से जाना जाता है।
विश्व में नाम:
मेक्सिको: मिल्पा
ब्राजील: रोका
वेनेजुएला: कोन्युको
अफ्रीका: मसोले
इंडोनेशिया: लदांग
वियतनाम: रे
श्रीलंका: चेना
भारत में नाम:
मध्य प्रदेश (M.P.): बेबर / दहिया
आंध्र प्रदेश (A.P.): पोडू / पेंडा
केरल: कुमारी
राजस्थान: वालरा / वालरे (भीलों के द्वारा दजिया व चिमाता आदि नामों से जाना जाता है)
ओडिशा: पामाडाबी / कोमान
हिमाचल: खिल
झारखंड: कुरुवा
उत्तर-पूर्वी भारत (असम): झूम
मणिपुर: पामलू
छत्तीसगढ़ व अंडमान निकोबार: दीपा
2. गहन निर्वाह कृषि
भूमि पर बढ़ती जनसंख्या के दबाव के कारण रासायनिक उर्वरकों की सहायता से अधिक उत्पादन के लिए की जाने वाली कृषि 'गहन निर्वाह कृषि' कहलाती है। बढ़ती जनसंख्या के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी खेत का आकार छोटा होता जाता है, जबकि बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। अतः भूमि पर अधिक उत्पादन का दबाव बढ़ रहा है।
3. वाणिज्यिक कृषि (व्यापारिक कृषि)
व्यापार के उद्देश्य से की जाने वाली कृषि वाणिज्यिक कृषि कहलाती है। इसमें अधिक उत्पादन हेतु उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण: पंजाब व हरियाणा में चावल की कृषि इसका प्रमुख उदाहरण है। (लेकिन ओडिशा में चावल का उत्पादन जीविका के लिए किया जाता है।)
4. रोपण कृषि
यह भी एक व्यापारिक कृषि है। इसमें पहले पौधे तैयार करके खेतों में लगाए जाते हैं। यह कृषि बड़े भू-भाग पर की जाती है। इससे प्राप्त उत्पाद को उद्योगों में कच्चे माल के रूप में काम में लेते हैं। इसमें पूंजी व श्रमिकों की आवश्यकता अधिक होती है।
प्रमुख फसलें: चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला, नारियल आदि।
शस्य प्रारूप (फसल ऋतुएं)
भारत में अनेक खाद्यान्न फसलें, सब्जियां, फल, मसाले आदि का उत्पादन करते हैं, जिनके आधार पर भारत में तीन शस्य प्रारूप हैं:
रबी की फसल:
बुआई व कटाई: यह अक्टूबर-नवंबर में बोते हैं और फरवरी-मार्च में काट लेते हैं।
विशेषता: इस फसल में शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा (मावट) से उत्पादन अधिक होता है।
प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, U.P., हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में गेहूँ आदि का उत्पादन किया जाता है।
खरीफ की फसल:
बुआई व कटाई: यह जून-जुलाई में बोते हैं और सितंबर-अक्टूबर में काट लेते हैं।
प्रमुख फसलें: बाजरा, मक्का, मूंग, ग्वार, ज्वार, मोठ, कपास, चावल आदि।
प्रमुख राज्य: U.P., बिहार, पश्चिम बंगाल, A.P., तमिलनाडु आदि।
जायद की फसल:
बुआई व कटाई: यह फरवरी-मार्च में बोयी जाती है और मई-जून में काट ली जाती है।
प्रमुख फसलें: फल, सब्जियां, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि।
मुख्य फसलें
1. चावल
चावल भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है।
भारत विश्व में चावल उत्पादन की दृष्टि से चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
चावल मुख्यतः खरीफ की फसल है, लेकिन इसे तीनों ऋतुओं (अमन, ओस, बोरो) में बोया जाता है।
आवश्यकताएँ: 25^\circ\text{C} से अधिक तापमान और 100\text{ cm} से अधिक वर्षा।
उत्पादक क्षेत्र: उत्तर, उत्तर-पूर्वी भारत, डेल्टा, तटीय प्रदेश आदि।
प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, U.P., बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान आदि।
2. गेहूँ
भारत की दूसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल गेहूँ है। यह रबी की फसल है, जो शीत ऋतु में बोयी जाती है।
आवश्यकताएँ: 50\text{ cm} से 75\text{ cm} औसत वर्षा।
उत्पादक क्षेत्र: (1) गंगा-सतलुज का मैदान, (2) दक्कन का काली मृदा वाला क्षेत्र।
प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, U.P., बिहार, राजस्थान, M.P. आदि।
3. मोटे अनाज (मिल्लेट्स)
ज्वार, बाजरा, रागी आदि प्रमुख मोटे अनाज हैं। इनमें पोषक तत्वों की अधिकता होती है। (जैसे—रागी में कैल्शियम एवं आयरन की अधिकता)।
ज्वार: भारत की तीसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि।
बाजरा: बाजरा मुख्यतः बलुआ व काली मृदा पर बोया जाता है। प्रमुख राज्य: राजस्थान, U.P., महाराष्ट्र, गुजरात आदि।
रागी: यह शुष्क क्षेत्र की फसल है जो लाल, काली, बलुई या दोमट मिट्टी पर बोयी जाती है। प्रमुख राज्य: कर्नाटक, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश आदि।
4. मक्का
मक्का एक खरीफ की फसल है, जो खाद्यान्न एवं चारे दोनों रूप में उपयोग ली जाती है।
आवश्यकताएँ: 21^\circ\text{C} से 27^\circ\text{C} तापमान तथा 50\text{ cm} से 100\text{ cm} वर्षा।
मृदा: पुरानी जलोढ़ मृदा।
प्रमुख राज्य: कर्नाटक, A.P., M.P., तेलंगाना आदि।
5. दालें
विश्व में सर्वाधिक दाल उत्पादन करने वाला देश भारत है। दालों में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
प्रकार: अरहर, मूंग, चना, मसूर, उड़द आदि।
प्रमुख राज्य: M.P., राजस्थान, महाराष्ट्र, U.P., ओडिशा, कर्नाटक आदि।
6. गन्ना
गन्ना उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु वाला पौधा है।
आवश्यकताएँ: 21^\circ\text{C} से 27^\circ\text{C} तापमान, 75\text{ cm} से 100\text{ cm} औसत वर्षा तथा आर्द्र जलवायु।
यह एक रोपण कृषि है जिसके लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
विश्व में सबसे ज्यादा गन्ना ब्राजील में और दूसरे स्थान पर भारत में होता है।
उपयोग: चीनी, गुड़, खांडसारी, शराब आदि बनाने में।
प्रमुख राज्य: U.P., महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, A.P., राजस्थान आदि।
7. तिलहन
2018 के अनुसार भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा तिलहन उत्पादक देश है। (तोरिया उत्पादन में चीन व कनाडा के बाद तीसरे स्थान पर)।
भारत के कुल बोए गए क्षेत्र के 12\% भाग पर तिलहन फसलों का उत्पादन होता है।
प्रमुख तिलहन: मूंगफली, सरसों, सोयाबीन, नारियल, तिल, सूरजमुखी, अरंडी आदि।
उपयोग: खाद्यान्न के अलावा साबुन, प्रसाधन सामग्री, उबटन आदि के कच्चे माल के रूप में।
मूंगफली: यह खरीफ की फसल है। भारत में आधे से अधिक तिलहन भाग पर मूंगफली उत्पादन होता है। सबसे बड़ा उत्पादक राज्य गुजरात है, इसके अलावा राजस्थान व A.P. में भी उत्पादन होता है।
8. चाय
यह रोपण फसल है जिसका उपयोग पेय पदार्थ के रूप में करते हैं।
यह उष्णकटिबंधीय पौधा है, जिसे ह्यूमस व जीवांश युक्त मृदा की आवश्यकता होती है। (यह अंग्रेजों द्वारा भारत लाया गया था)।
आवश्यकताएँ: नम एवं पाला रहित जलवायु।
प्रमुख राज्य: असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी), तमिलनाडु व केरल आदि।
भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है, लेकिन सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है।
9. कॉफी
भारत में विश्व प्रसिद्ध "अरेबिका" किस्म की कॉफी का उत्पादन किया जाता है, जो मूलतः यमन से लायी गयी थी।
भारत में सर्वप्रथम इसकी कृषि बाबा बूदन की पहाड़ियों पर की गई थी। वर्तमान में केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु की नीलगिरी की पहाड़ियों पर की जाती है।
अन्य नकदी व बागवानी फसलें
बागवानी फसलें
2018 के अनुसार भारत फल व सब्जी उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
आम: A.P., महाराष्ट्र, तेलंगाना व M.P.
संतरे/नारंगी: नागपुर व चेरापूंजी
केले: केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु व मिजोरम
लीची व अमरूद: U.P. व बिहार
अनानास: मेघालय
सेब, केसर, अखरोट: कश्मीर
नोट: मटर, टमाटर, बैंगन, गोभी, आलू आदि के उत्पादन में भारत विश्व में प्रमुख स्थान रखता है।
रबड़
रबड़ भूमध्यरेखीय क्षेत्र की फसल है।
आवश्यकताएँ: 200\text{ cm} से अधिक वर्षा, 25^\circ\text{C} से अधिक तापमान तथा आर्द्र जलवायु।
प्रमुख राज्य: तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, मेघालय, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह आदि।
रेशेदार फसलें
1. कपास
कपास खरीफ की फसल है और भारत का मूल पौधा है। इसका उपयोग वस्त्र उद्योग में किया जाता है।
आवश्यकताएँ: काली मृदा, उच्च तापमान, हल्की वर्षा, 210 दिन पाला रहित आकाश तथा खिली धूप।
समयावधि: 6 से 8 महीने में तैयार होती है।
प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, A.P., तमिलनाडु, कर्नाटक आदि।
भारत कपास उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
2. जूट
जूट उत्पादन में भारत प्रथम स्थान पर है। इसे "सुनहरा रेशा" (Golden Fibre) भी कहा जाता है।
उपयोग: बैग, गलीचे, चटाई, बोरी एवं पैकिंग का सामान बनाने में।
उत्पादक क्षेत्र: बाढ़ के मैदान व डेल्टाई भाग (उच्च तापमान की आवश्यकता)।
प्रमुख राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम आदि।
3. रेशम
रेशम का उत्पादन रेशम कीट के कोकून (Cocoon) से होता है।
रेशम कीट का पालन शहतूत (मलबरी) के पत्तों पर किया जाता है।
रेशम कीट पालन या रेशम उत्पादन सेरीकल्चर (Sericulture) कहलाता है।
किसान पोर्टल वेबसाइट: इस वेबसाइट के द्वारा किसानों को कृषि एवं कृषि से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है:
https://farmer.gov.in (Farmer Home.aspx)
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