सत्ता की साझेदारी



अध्याय-1 सत्ता की साझेदारी

​सत्ता की साझेदारी का अर्थ:- सत्ता या शासन का बँटवारा सत्ता की साझेदारी कहलाता है। अर्थात सत्ता में सभी लोगों की भागीदारी को ही सत्ता की साझेदारी कहते हैं। इसमें सभी शक्तियाँ सरकार के विभिन्न अंगों में बँटी हुई होती हैं। विश्व के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में सत्ता की साझेदारी देखने को मिलती है।

​सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है?:- सत्ता की साझेदारी के पक्ष को हम निम्न तर्क के द्वारा समझ सकते हैं:-

​सत्ता का बँटवारा ठीक तरह से हो:- विभिन्न समुदायों के बीच टकराव, तनाव, झगड़ा न हो इसलिए सत्ता का बँटवारा आवश्यक है। देश की राजनैतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए सत्ता में सभी समुदायों के लोगों की भागीदारी अति आवश्यक है।

​सत्ता का बँटवारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक है:- सत्ता का बँटवारा लोकतंत्र के लिए अच्छा होता है, क्योंकि वैध शासन वही है, जिसमें लोग अपनी भागीदारी के माध्यम से शासन से जुड़ते हैं। इसलिए सत्ता की साझेदारी को लोकतंत्र की आत्मा कहा जाता है।

​सत्ता की साझेदारी के रूप:- वर्तमान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सत्ता की साझेदारी के अनेक रूप हो सकते हैं, जो निम्न हैं:-

​शासन के विभिन्न अंगों में बँटवारा:- सरकार का बँटवारा मुख्यतः तीन अंगों में पाया जाता है। जिन्हें कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका कहा जाता है। ये तीनों अंग अपनी-अपनी शक्तियों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करते हैं। व्यवस्थापिका का कार्य कानून बनाना, कार्यपालिका का कार्य कानून को लागू करना तथा न्यायपालिका का कार्य कानून की जाँच करना व न्याय करना होता है। न्यायपालिका, व्यवस्थापिका व कार्यपालिका द्वारा बनाए गए कानूनों पर नियंत्रण रखती है। जिसे नियंत्रण एवं संतुलन का सिद्धांत कहते हैं।

​सरकार के विभिन्न स्तरों में सत्ता का बँटवारा:- लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के विभिन्न स्तर पाए जाते हैं। सम्पूर्ण देश के शासन के लिए केन्द्र सरकार तथा प्रांतों की सरकार को राज्य सरकार कहा जाता है। भारत में शासन का तीसरा स्तर भी जोड़ा गया है, जिसे स्थानीय शासन कहा जाता है। स्थानीय शासन में नगरपालिका व ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। उच्च एवं निम्न स्तर की सरकार के बीच सत्ता के बँटवारे को सत्ता का ऊर्ध्वाधर वितरण कहा जाता है।

​विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा:- कुछ देशों में कमजोर समुदाय एवं महिलाओं को सत्ता में हिस्सेदारी दी जाती है, ताकि वह स्वयं को शासन से अलग न समझें। जैसे:- बेल्जियम की सरकार।

​राजनैतिक दलों व दबाव समूहों के द्वारा सत्ता का बँटवारा:- लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारधारा एवं सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ में सत्ता रहती है, अतः यह राजनैतिक दल सत्ता का बँटवारा कर लेते हैं।

​बेल्जियम में सत्ता की साझेदारी:- बेल्जियम यूरोप में स्थित हरियाणा से भी छोटा देश है। बेल्जियम की सीमाएँ फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड तथा लक्ज़मबर्ग से लगती हैं। जिसकी कुल जनसंख्या लगभग 1 करोड़ है। बेल्जियम की जातीय बनावट कठिन है। यहाँ की 59% जनसंख्या फ्लेमिश क्षेत्र में निवास करती है, तथा डच भाषा बोलती है। बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में 80% जनसंख्या फ्रेंच एवं 20% जनसंख्या डच भाषा बोलती है। जबकि 40% जनसंख्या वेलोनिया में निवास करती है, एवं फ्रेंच भाषा बोलती है। शेष 1% जनसंख्या जर्मन भाषा बोलती है।

फ्रेंच भाषा बोलने वाले अल्पसंख्यक (कम) लोग समृद्ध (धनी) एवं ताकतवर हैं, जबकि डच लोग बहुसंख्यक (ज्यादा) थे। अतः 1950 से 1960 के बीच फ्रेंच व डच भाषा बोलने वालों के बीच तनाव बढ़ गया जो कि बेल्जियम की बड़ी समस्या थी। बेल्जियम में डच भाषी लोग अपनी संख्या के बल पर फ्रेंच व जर्मन भाषी लोगों पर अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे। लेकिन उन्होंने सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया।

​बेल्जियम की समझदारी:- बेल्जियम के नेताओं ने क्षेत्रीय विभिन्नता एवं सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया। बेल्जियम में लोगों को बेगानेपन का अहसास न हो तथा सभी मिल-जुलकर रहें इसलिए बेल्जियम के संविधान में 1970 से 1993 के बीच चार बार संविधान में संशोधन किए गए।

​बेल्जियम के मॉडल (संविधान) की विशेषताएँ:-

​बेल्जियम की केंद्रीय सरकार में डच एवं फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहेगी।

​कुछ विशेष कानून तभी बनेंगे जब दोनों भाषायी समूह के सांसदों का बहुमत होगा। अर्थात एक समुदाय के लोग फैसला नहीं कर सकते।

​* राज्य सरकार केन्द्र सरकार के अधीन नहीं होगी।

* ब्रुसेल्स में अलग सरकार है, जिसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व होगा।

* सरकार के तीसरे स्तर में 'सामुदायिक सरकार' बनायी गयी जिसका चुनाव एक ही भाषा बोलने वाले करते थे। इसे संस्कृति, शिक्षा एवं भाषा पर फैसले लेने का अधिकार दिया गया।

​बेल्जियम के इस मॉडल से गृहयुद्ध की आशंका पर विराम लग गया। अतः बेल्जियम (ब्रुसेल्स) को यूरोपीय संघ का मुख्यालय चुना गया।

​श्रीलंका में सत्ता की साझेदारी:- श्रीलंका तमिलनाडु के दक्षिण में स्थित एक द्वीपीय देश है। जिसकी जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है। यहाँ अनेक जातीय समूह के लोग रहते हैं। श्रीलंका की 74% जनसंख्या सिंहली समूह की है, जबकि 18% तमिल समूह की जनसंख्या है। तमिल जनसंख्या दो समूहों में विभाजित है:-

​श्रीलंका के मूल तमिल (13%)

​भारतीय तमिल (5%)

​हिन्दुस्तानी (भारतीय) तमिल औपनिवेशिक काल में बागानों में काम करने के लिए भारत से लाए गए लोगों की संतान हैं। अधिकांश तमिल श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी प्रांत में निवास करते हैं। सिंहली भाषियों का धर्म बौद्ध है, जबकि तमिल भाषी हिन्दू एवं कुछ मुस्लिम हैं। इनके अलावा श्रीलंका में 7% जनसंख्या ईसाई है।

​श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद:- 1948 में श्रीलंका की आजादी के समय सिंहली भाषी लोगों ने अपनी संख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा। अतः लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार ने सिंहली समुदाय की प्रभुता कायम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए:- सन् 1956 में एक कानून बनाकर सिंहली को श्रीलंका की राजभाषा घोषित किया गया तथा सभी विश्वविद्यालयों व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी गई। नए संविधान में बौद्ध धर्म को संरक्षण देने का प्रावधान किया गया।

​इन फैसलों ने तमिलों की नाराजगी बढ़ाई। उन्हें लगा कि संविधान एवं सरकारी नीतियां उन्हें राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर रही हैं। नौकरी एवं अन्य कार्यों में भेदभाव एवं उनके हितों की अनदेखी (उपेक्षा) की जा रही है।

​अतः तमिल एवं सिंहली लोगों के संबंध बिगड़ते चले गए तथा तमिलों ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनायी एवं तमिल को राजभाषा बनाने, शिक्षा व रोजगार में समान अवसर पाने के लिए संघर्ष किया।

​1980 के दशक में उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र (तमिल ईलम) सरकार बनाने के लिए राजनीतिक संगठन बनाए गए। जिससे दोनों समुदायों में आपसी टकराव के कारण हजारों लोग मारे गए एवं कुछ परिवार श्रीलंका छोड़कर भाग गए। अंत में यह गृहयुद्ध 2009 में समाप्त हुआ।

​बेल्जियम व श्रीलंका विद्रोह का परिणाम (शिक्षा):- दोनों लोकतांत्रिक देशों ने सत्ता की साझेदारी को अलग तरीके से पेश किया है।

​बेल्जियम को लगा कि विभिन्न समुदायों की भावनाओं का आदर करने पर ही देश की एकता संभव है। अतः दोनों पक्ष साझेदारी के लिए सहमत हो गए।

​जबकि श्रीलंका में बेल्जियम के ठीक विपरीत, बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने एवं सत्ता में साझेदारी न बनाने का फैसला करता है, जिससे देश की एकता संकट में पड़ गयी।




बहुविकल्पीय प्रश्न (उत्तर सहित)

​प्रश्न 1. श्रीलंका में आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा किस प्रमुख सामाजिक समूह का है?

(A) सिंहली

(B) तमिल

(C) ईसाई

(D) मुस्लिम

उत्तर- (A) सिंहली

​प्रश्न 2. बेल्जियम की सीमाएं किन देशों से लगती हैं?

(A) नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रिया

(B) फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी, लक्ज़मबर्ग

(C) पुर्तगाल, स्पेन, रोमानिया, स्वीडन

(D) इटली, पोलैंड, लातविया, बोस्निया

उत्तर- (B) फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी, लक्ज़मबर्ग

​प्रश्न 3. 1970 से 1993 के बीच बेल्जियम के संविधान में कितनी बार संशोधन किए गए?

(A) सात बार

(B) तीन बार

(C) पाँच बार

(D) चार बार

उत्तर- (D) चार बार

​प्रश्न 4. बेल्जियम की जनसंख्या कितनी है?

(A) लगभग 2 करोड़

(B) लगभग 1 करोड़

(C) लगभग 4 करोड़

(D) लगभग 3 करोड़

उत्तर- (B) लगभग 1 करोड़

​प्रश्न 5. बेल्जियम में किस जातीय समूह की सबसे अधिक आबादी है?

(A) फ्लेमिश

(B) जर्मन

(C) फ्रेंच

(D) ईसाई

उत्तर- (A) फ्लेमिश

​प्रश्न 6. बहुसंख्यकवाद सिद्धान्त के कारण किस देश में गृह-युद्ध हुआ?

(A) फ्रांस

(B) श्रीलंका

(C) जर्मनी

(D) फ्लेमिश

उत्तर- (B) श्रीलंका

प्रश्न 7. सत्ता के क्षैतिज वितरण से क्या तात्पर्य है?

(A) सत्ता का संघीय वितरण

(B) सत्ता का अलगाव वितरण

(C) कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका में सत्ता का वितरण

(D) केन्द्र और राज्यों के बीच बँटवारा

उत्तर- (C) कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका में सत्ता का वितरण

​प्रश्न 8. यूरोपीय संघ का मुख्यालय कहाँ है?

(A) ओस्लो

(B) ब्रूसेल्स

(C) टोकियो

(D) जेनेवा

उत्तर- (B) ब्रूसेल्स

​प्रश्न 9. कौन सा जातीय समूह ब्रूसेल्स में बहुसंख्यक है?

(A) फ्रांसीसी भाषी

(B) डच भाषी

(C) जर्मन भाषी

(D) इंग्लिश भाषी

उत्तर- (A) फ्रांसीसी भाषी

​प्रश्न 10. बेल्जियम में जर्मन भाषी लोग कितने प्रतिशत हैं?

(A) 5 प्रतिशत

(B) 7 प्रतिशत

(C) 10 प्रतिशत

(D) 1 प्रतिशत

उत्तर- (D) 1 प्रतिशत

​प्रश्न 11. निम्न में कौन सी भाषा को सन् 1956 में श्रीलंका में राजभाषा का दर्जा दिया गया?

(A) सिंहली

(B) हिन्दी

(C) तमिल

(D) अरबी

उत्तर- (A) सिंहली

प्रश्न 12. बेल्जियम में सामुदायिक सरकार का चुनाव निम्न में से कौन करता है?

(A) देश के नागरिक

(B) सामुदायिक नेता

(C) एक ही भाषा बोलने वाले लोग

(D) बेल्जियम के नेता

उत्तर- (C) एक ही भाषा बोलने वाले लोग

​प्रश्न 13. बेल्जियम में फ्रांसीसी भाषा बोलने वाले लोगों का प्रतिशत क्या है?

(A) 50

(B) 40

(C) 30

(D) 20

उत्तर- (B) 40

​1 अंक वाले प्रश्न :-

​प्रश्न 1. 1970 और 1993 के बीच बेल्जियम के संविधान में कितनी बार संशोधन किए गए?

उत्तर- चार बार

​प्रश्न 2. श्रीलंका में सिंहली समुदाय की प्रभुता कायम करने के लिए किस प्रकार की सरकार का गठन किया गया है?

उत्तर- बहुसंख्यकवाद सरकार।

​प्रश्न 3. बेल्जियम में किस जातीय समूह की आबादी सबसे अधिक है?

उत्तर- डच

​प्रश्न 4. श्रीलंका में सबसे अधिक संख्या किस सामाजिक समूह की है?

उत्तर- सिंहली

​प्रश्न 5. बेल्जियम में मुख्य रूप से कौन सी दो भाषाएँ बोली जाती हैं?

उत्तर- डच और फ्रेंच

​प्रश्न 6. यूरोपीय संघ का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

उत्तर- ब्रूसेल्स

​प्रश्न 7. बेल्जियम में कौन सा अल्पसंख्यक वर्ग अमीर और शक्ति संपन्न है?

उत्तर- फ्रेंच

​प्रश्न 8. बहुसंख्यकवाद के कारण कौन सा देश लंबे समय तक गृहयुद्ध की आग में झुलसता रहा?

उत्तर- श्रीलंका

​प्रश्न 9. सत्ता की साझेदारी किस चीज में सर्वाधिक सहायक है?

उत्तर- संघर्ष को रोकने में

​प्रश्न 10. बेल्जियम में सामुदायिक सरकार का चुनाव किसके द्वारा किया जाता है?

उत्तर- भाषा के आधार पर (डच, फ्रेंच और जर्मन बोलने वाले लोग)

लघु/दीर्घ प्रश्न (3/5 अंक वाले प्रश्न) :-

​प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूपों का उल्लेख कीजिए?

उत्तर-

​सत्ता का क्षैतिज वितरण - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।

​सत्ता का उर्ध्वाधर वितरण - केन्द्रीय सरकार, प्रांतीय सरकार और स्थानीय सरकार।

​प्रश्न 2. बेल्जियम के समाज में विभिन्न भाषायी लोगों के बीच तनाव के क्या कारण थे?

उत्तर-

​बहुसंख्यक डच की अवहेलना

​अल्पसंख्यक फ्रेंच का अधिक ताकतवर और समृद्ध होना।

​आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ एक खास समुदाय तक सीमित रहना।

​राजनीतिक सत्ता एक समुदाय विशेष में केंद्रित थी।

​प्रश्न 3. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद ने किस प्रकार सामाजिक तनाव को जन्म दिया?

उत्तर-

​बहुसंख्यकवाद के तहत सिंहलियों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया।

​सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सिंहलियों का एकाधिकार।

​सिंहली की एकमात्र राजभाषा का दर्जा।

​तमिलों के हितों को दरकिनार करना।

​तमिलों को राजनीतिक अधिकार से वंचित रखना।

​प्रश्न 4. सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक है? तर्क दीजिए।

उत्तर-

​विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव को कम करना।

​यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल है।

​यह राजनीतिक अस्थिरता को कम करता है।

​सत्ता में अधिक से अधिक लोगों को भागीदार बनाता है।

​प्रश्न 5. सामाजिक विविधताओं वाले शासन में सत्ता का बँटवारा किस प्रकार किया जा सकता है?

उत्तर-

​विभिन्न सामाजिक समूहों जैसे – भाषायी और धार्मिक समूहों के बीच सत्ता का विभाजन।

​सामाजिक रूप से पिछड़े हुए लोगों और महिलाओं को विधायिका में हिस्सेदारी देना।

​अल्पसंख्यक समुदायों को आरक्षण देकर।

​अत्यंत पिछड़े हुए वर्ग के लिए अलग से सरकारी नीतियां बनाना।

​प्रश्न 6. श्रीलंका में पास हुए 1956 के कानून के अनुसार सिंहली लोगों के वर्चस्व के तीन प्रावधान लिखिए।

(नोट: चित्र में गलती से 1950 लिखा है, जो कि 1956 होना चाहिए)

उत्तर-

​सिंहली भाषा की श्रीलंका की राजकीय भाषा घोषित करना।

​सिंहली लोगों की शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देना।

​सिंहली लोगों को राजनैतिक प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से भाग लेने का अधिकार।

​बौद्ध धर्म को पूजा अर्चना की पूर्ण स्वतंत्रता।

प्रश्न 7. सत्ता के ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) वितरण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

A) ऊर्ध्वाधर वितरण में सरकार के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं।

B) क्षैतिज वितरण में उच्चतर तथा निम्नतर स्तर की सरकारें होती हैं।

C) ऊर्ध्वाधर वितरण में विभिन्न स्तरों (जैसे केंद्र और राज्य) पर सत्ता का बंटवारा होता है, जबकि क्षैतिज वितरण में सरकार के विभिन्न अंगों के बीच।

D) क्षैतिज वितरण में निम्नतर अंग हमेशा उच्चतर अंग के अधीन रहकर कार्य करते हैं।

​प्रश्न 8. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद लागू करने के क्या प्रभाव हुए?

A) सिंहली और तमिल समुदायों के बीच आपसी मेलजोल और शांति बढ़ी।

B) तमिलों में नाराजगी व बेगानेपन की भावना बढ़ी, जिससे आगे चलकर गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हुई।

C) तमिल भाषा को श्रीलंका की एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया।

D) सभी धर्मों को समान संरक्षण देकर देश में आर्थिक समानता स्थापित की गई।

​प्रश्न 9. बेल्जियम में सामाजिक विविधताओं से उत्पन्न समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया गया?

A) देश को दो अलग-अलग राष्ट्रों में विभाजित करके।

B) केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान रखकर तथा सामुदायिक सरकार का गठन करके।

C) क्षेत्रीय सरकारों की सभी शक्तियाँ छीनकर पूरी तरह केंद्र सरकार को सौंपकर।

D) अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को पूरी तरह से समाप्त करके।

​प्रश्न 10. विभिन्न दबाव समूह (Pressure Groups) और राजनीतिक दल किस प्रकार सत्ता के बंटवारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?

A) सरकार पर दबाव बनाकर, नीतियों को प्रभावित करके और विभिन्न हित समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करके।

B) केवल चुनाव जीतकर और अन्य सभी छोटे संगठनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाकर।

C) जनता की मुख्य समस्याओं की अनदेखी करके और केवल अपने निजी हितों को बढ़ावा देकर।

D) सरकार की सभी समितियों को भंग करके सीधे शासन अपने हाथ में लेकर।

प्रश्न 11. तमिल भाषी लोगों की क्या माँग है?

उत्तर- (1) श्रीलंका में तमिल भाषी लोगों ने अपने राजनीतिक दलों के माध्यम से निम्नलिखित माँगें रखी हैं-

​तमिल भाषा को राजभाषा बनाया जाए।

​क्षेत्रीय स्वायत्तता दी जाए।

​अन्य जातीय समूहों के समान शिक्षा तथा रोजगार की सुविधाएँ दी जाएँ।

​1980 के दशक में तमिल ईलम (सरकार) बनाने की माँग की थी।

​प्रश्न 12. सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है? तीन कारण बताइए।

उत्तर-

​यह सामाजिक समूहों के बीच संघर्ष की सम्भावना को कम करती है।

​सत्ता की साझेदारी प्रजातंत्र का आधार है। यह विकास के लिए आवश्यक है।

​श्रीलंका में सत्ता बहुसंख्यक सिंहलियों के पास थी। जिससे अल्पसंख्यक तमिलों को बुरा लगा और पूरा देश गृह युद्ध में फँस गया।

​प्रश्न 13. सन् 1960 के दशक में बेल्जियम में असन्तोष के क्या कारण थे? असन्तोष किस प्रकार दूर किया गया?

उत्तर-

​अल्पसंख्यक फ्रेंच भाषी लोग तुलनात्मक दृष्टि से समृद्ध और ताकतवर थे। बहुसंख्यक डचभाषी लोगों को इससे नाराजगी थी।

​राजधानी ब्रूसेल्स में डच भाषी अल्पमत में और फ्रेंचभाषी बहुसंख्यक थे।

​क्षेत्रीय अन्तरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार कर टकराव का समाधान किया गया।

​प्रश्न 14. आधुनिक लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी के चार रूपों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

​सत्ता की साझेदारी सरकार के विभिन्न अंगों के बीच होती है।

​सरकार के विभिन्न स्तरों पर सत्ता की साझेदारी होती है।

​सत्ता की साझेदारी विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच होती है।

​सत्ता की साझेदारी राजनैतिक दलों, दबाव समूहों एवं सामाजिक आन्दोलनों द्वारा होती है।

​प्रश्न 15. सत्ता के क्षैतिज वितरण को तीन उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर-

​शासन के विभिन्न अंगों विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा क्षैतिज वितरण कहलाता है।

​सभी अंगों के बीच शक्तियों का विभाजन होता है ताकि कोई भी सत्ता का असीमित उपयोग न कर सके।

​हर अंग एक दूसरे पर अंकुश रखता है। इस प्रकार सभी के बीच शक्ति संतुलन बना रहता है।

​प्रश्न 16. उर्ध्वाधर वितरण को समझाइए?

उत्तर-

​उच्चतर और निम्नतर सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा उर्ध्वाधर वितरण कहलाता है।

​केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन इसका एक अच्छा उदाहरण है।

​राज्य सरकार से नीचे के स्तर की सरकारों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था है। नगरपालिका और पंचायतें ऐसी ही इकाइयाँ हैं।

प्रश्न 17. श्रीलंका में बहुसंख्यक वाद तथा इसके प्रभावों का वर्णन करें?

उत्तर-

​1956 में कानून बनाकर तमिलों को उपेक्षित कर सिंहली को राजभाषा घोषित कर दिया। जिससे तमिल वर्ग असन्तुष्ट हो गया।

​विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता दी गयी जिससे तमिल नाराज हो गये।

​सरकार द्वारा बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा दिया गया। इससे भी तमिलों समुदाय असन्तुष्ट हो गया। जिससे श्रीलंका में गृहयुद्ध का जन्म हुआ।

​प्रश्न 18. बेल्जियम में सामाजिक विविधताओं से उत्पन्न समस्याओं का समाधान कैसे किया गया?

उत्तर-

​सरकार ने व्याप्त विविधताओं को स्वीकार किया और संविधान में चार संशोधन किए।

​केन्द्र सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान होगी।

​राज्य सरकारें केन्द्रीय सरकारों के अधीन नही रहेगी।

​सामुदायिक सरकार का निर्माण एक ही भाषा बोलने वाले लोग करेंगे। इससे सभी के बीच सन्तुलन स्थापित हो गया।

​प्रश्न 19. युक्तिपरक और नैतिक तर्क में क्या अंतर है?

उत्तर-

​लाभ-हानि का सावधानी पूर्वक हिसाब लगाकर लिया गया फैसला युक्तिपरक तर्क कहलाता है।

​नैतिक तर्क सत्ता के उचित बँटवारे का चिन्तन होता है।

​दोनों तर्कों के द्वारा आपसी टकराव को टाला जा सकता है।

​प्रश्न 20. श्रीलंकाई तमिलों ने अपने अधिकारों के लिए किस प्रकार संघर्ष किया?

उत्तर-

​तमिलों द्वारा राजनैतिक पार्टियाँ बनायी गयी।

​तमिलों द्वारा बराबरी की मांग की गयी।

​तमिलों ने स्वतन्त्र तमिल ईलम की मांग की और हिंसा का भी सहारा लिया।

​प्रश्न 21. विभिन्न दबाव समूह और राजनैतिक दल किस प्रकार सत्ता के बँटवारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है?

उत्तर-

​राजनैतिक दल समाज में अपनी अपनी विशेषताएँ बताकर जनता को प्रभावित करते है।

​व्यापारियों, किसानों आदि वर्गों के हित समूह सत्ता पर दबाव बनाकर सत्ता में हिस्सेदारी प्राप्त करते है।

​वर्तमान में गठबंधन की सरकार साझेदारी का एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न 22. सामाजिक विविधताओं वाले शासन में सत्ता का बँटवारा किस प्रकार किया जा सकता है?

उत्तर-

​सत्ता का बँटवारा विभिन्न सामाजिक समूहों में भाषा और धार्मिक आधार पर किया जा सकता है।

​आर्थिक रूप से कमजोर तथा महिलाओं को आरक्षण देकर सत्ता का बंटवारा किया जा सकता है।

​अल्पसंख्यकों को भी उचित हिस्सेदारी देकर सन्तुष्ट किया जा सकता है। इस प्रकार समझदारी से सत्ता का उचित बँटवारा कर आपसी तालमेल ठीक किया जा सकता है।




​प्रश्न 23. आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं? इनमें से प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें।

उत्तर आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अनेक रूप हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

​1. शासन के विभिन्न अंगों के बीच बँटवारा – शासन के विभिन्न अंग, जैसे-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा रहता है। इसमें सरकार के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं। इसमें कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित प्रयोग नहीं करता, हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है। इससे विभिन्न संस्थाओं के बीच सत्ता का संतुलन बना रहता है। इसके सबसे अच्छे उदाहरण अमेरिका व भारत हैं। यहाँ विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका कानून को लागू करती है तथा न्यायपालिका न्याय करती है। भारत में कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी है, न्यायपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका करती है, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के कानूनों की जाँच करके उन पर नियंत्रण रखती है।

2. सरकार के विभिन्न स्तरों में बँटवारा – पूरे देश के लिए एक सरकार होती है जिसे केंद्र सरकार या संघ सरकार कहते हैं। फिर प्रांत या क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग सरकारें बनती हैं, जिन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। भारत में इन्हें राज्य सरकार कहते हैं। इस सत्ता के बँटवारे वाले देशों में संविधान में इस बात का स्पष्ट उल्लेख होता है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा किस तरह होगा। सत्ता के ऐसे बँटवारे को ऊर्ध्वाधर वितरण कहा जाता है। भारत में केंद्र और राज्य स्तर के अतिरिक्त स्थानीय सरकारें भी काम करती हैं। इनके बीच सत्ता के बँटवारे के विषय में संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा गया है जिससे विभिन्न सरकारों के बीच शक्तियों को लेकर कोई तनाव न हो।

3. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा – कुछ देशों के संविधान में इस बात का प्रावधान है कि सामाजिक रूप से कमजोर समुदाय और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी दी जाए ताकि लोग स्वयं को शासन से अलग न समझने लगें। अल्पसंख्यक समुदायों को भी इसी तरीके से सत्ता में उचित हिस्सेदारी दी जाती है। बेल्जियम में सामुदायिक सरकार इस व्यवस्था का अच्छा उदाहरण है।

4. राजनीतिक दलों व दबाव समूहों द्वारा सत्ता का बँटवारा – लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता बारी-बारी से अलग अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है। लोकतंत्र में हम व्यापारी, उद्योगपति, किसान और औद्योगिक मजदूर जैसे कई संगठित हित समूहों को भी सक्रिय देखते हैं। सरकार की विभिन्न समितियों में सीधी भागीदारी करने या नीतियों पर अपने सदस्य वर्ग के लाभ के लिए दबाव बनाकर ये समूह भी सत्ता में भागीदारी करते हैं। अमेरिका इसका अच्छा उदाहरण है। वहाँ दो राजनीतिक दल प्रमुख हैं जो चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं तथा दबाव समूह चुनावों के समय व चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक दलों की आर्थिक मदद करके, सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित करके सत्ता में भागीदारी निभाते हैं।

​प्रश्न 24. भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताएँ।

उत्तर भारत में सत्ता का बँटवारा सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच हुआ है, जैसे-केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार।

​युक्तिपरक कारण – भारत एक घनी आबादी वाला देश है। पूरे देश के लिए एक ही सरकार के द्वारा कानून बनाना, शांति तथा व्यवस्था बनाना संभव नहीं है। इसलिए सरकार को विभिन्न स्तरों में बाँट दिया गया है और उनके बीच कार्यों का बँटवारा संविधान में लिखित रूप से कर दिया गया है, जिससे ये सरकारें बिना झगड़े देश के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर शासन कर सकें।

​नैतिक कारण – लोकतान्त्रिक देश में सत्ता का बँटवारा जरूरी है। यदि एक ही प्रकार की सरकार होगी तो वह निरंकुश हो जाएगी, ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी शासन में नहीं हो पाएगी जो कि लोकतंत्र के लिए जरूरी है। इसलिए भारत में विभिन्न स्तरों पर सरकारों का वर्गीकरण कर दिया गया है।

​प्रश्न 25. इस अध्याय को पढ़ने के बाद तीन छात्रों ने अलग-अलग निष्कर्ष निकाले। आप इनमें से किससे सहमत हैं और क्यों? अपना जवाब करीब 50 शब्दों में दें।

​थम्मन – जिन समाजों में क्षेत्रीय, भाषायी और जातीय आधार पर विभाजन हो सिर्फ वहीं सत्ता की साझेदारी जरूरी है।

​मथाई – सत्ता की साझेदारी सिर्फ ऐसे देशों के लिए उपयुक्त है जहाँ क्षेत्रीय विभाजन मौजूद होते हैं।

​औसेफ – हर समाज में सत्ता की साझेदारी की जरूरत होती है। भले ही वह छोटा हो या उसमें सामाजिक विभाजन न हो।

​उत्तर हम औसेफ के निष्कर्ष से सहमत हैं कि हर समाज में सत्ता की साझेदारी की जरूरत होती है। भले ही वह छोटा हो या उसमें सामाजिक विभाजन न हो। क्योंकि सत्ता का बँटवारा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए ठीक है। सत्ता की साझेदारी वास्तव में लोकतंत्र की आत्मा है। लोकतंत्र का मतलब ही होता है कि जो लोग इस शासन व्यवस्था के अंतर्गत हैं उनके बीच सत्ता को बाँटा जाए और ये लोग इसी ढर्रे में रहें। वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं।

प्रश्न 26. बहुसंख्यकवाद क्या है? श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद किस प्रकार फैला? इससे क्या समस्याएँ उत्पन्न हुईं? इसका क्या परिणाम हुआ?

​उत्तर— बहुसंख्यकवाद— बहुसंख्यकवाद वह स्थिति है जिसमें एक देश का बहुसंख्यक समुदाय अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है और इसके लिए वह अल्पसंख्यक समुदाय की ज़रूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है।

​श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद का उद्भव—

​सन् 1948 में श्रीलंका के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के साथ ही वहाँ बहुसंख्यकवाद का उद्भव होना शुरू हो गया। सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा। इस वजह से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार ने सिंहली समुदाय की प्रभुता कायम करने के लिए अपनी बहुसंख्यक-परस्ती के तहत निम्न प्रमुख कदम उठाए—

​(1) 1956 में एक कानून बनाया गया जिसके तहत तमिल भाषा की उपेक्षा करते हुए सिंहली भाषा को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया।

​(2) विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी चलाई गई।

​(3) नए संविधान में यह प्रावधान भी किया गया कि सरकार बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी।

​श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद से उत्पन्न समस्याएँ—

​(1) श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के चलते इन सरकारी फैसलों ने श्रीलंकाई तमिलों की नाराजगी और शासन को लेकर उनमें बेगानापन बढ़ाया।

​(2) उन्हें लगा कि बौद्ध धर्मावलंबी सिंहलियों के नेतृत्व वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं।

​(3) उन्हें लगा कि संविधान और सरकार की नीतियां उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर रही हैं।

​(4) नौकरियों और फायदे के अन्य कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है और उनके हितों की अनदेखी की जा रही है।

​परिणाम—

​(1) श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के कारण तमिल और सिंहली समुदायों के संबंध बिगड़ते चले गए।

​(2) श्रीलंकाई तमिलों ने अपनी राजनीतिक पार्टियाँ बनाईं और तमिल को राजभाषा बनाने, क्षेत्रीय स्वायत्तता हासिल करने तथा शिक्षा और रोजगार में समान अवसरों की माँग को लेकर संघर्ष किया। लेकिन तमिलों की आबादी वाले क्षेत्र की स्वायत्तता की उनकी माँगों को लगातार नकारा गया।

​(3) 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम (सरकार) बनाने की माँग को लेकर अनेक राजनीतिक संगठन बने।

​(4) श्रीलंका में दो समुदायों के बीच का यह टकराव गृहयुद्ध में परिणत हुआ। परिणामस्वरूप दोनों पक्ष के हजारों लोग मारे गये।

​(5) अनेक परिवार अपने मुल्क से भागकर शरणार्थी बन गए।

​(6) लाखों लोगों की रोजी-रोटी चौपट हो गई।

​(7) गृहयुद्ध से श्रीलंका के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में काफी परेशानियाँ पैदा हुई हैं। 2009 में इस गृहयुद्ध का अंत हुआ।

प्रश्न 27. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है श्रीलंका और बेल्जियम का उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए?



उत्तर— एक अच्छा लोकतांत्रिक शासन वह है जिसमें समाज के विभिन्न समूहों के ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को राजनीतिक सत्ता में भागीदार बनाया जाये। इसे बेल्जियम और श्रीलंका के जनतांत्रिक स्वरूपों के द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है—

​(1) बेल्जियम में जातीय समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी— बेल्जियम में विभिन्न भाषायी समुदायों (59% डच भाषा-भाषी, 40% फ्रेंच भाषा-भाषी तथा 1% जर्मन भाषा-भाषी समुदायों) के बीच सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था के तहत निम्नलिखित संवैधानिक प्रावधान किये गए हैं—

​(i) केन्द्र सरकार में डच और फ्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहेगी। कुछ विशेष कानून तभी बन सकते हैं जब दोनों भाषायी समूह के सांसदों का बहुमत उसके पक्ष में हो। इस प्रकार किसी समुदाय के लोग एकतरफा फैसला नहीं कर सकते।

​(ii) संविधान द्वारा केन्द्र सरकार की अनेक शक्तियाँ देश के दो इलाकों की क्षेत्रीय सरकारों के सुपुर्द कर दी गई हैं।

​(iii) राजधानी क्षेत्र ब्रूसेल्स में दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है। यह व्यवस्था बेहद सफल रही है। इससे मुल्क में गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लग गया है वरना गृहयुद्ध की स्थिति में बेल्जियम भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता।

​(2) श्रीलंका की जनतंत्रीय व्यवस्था— श्रीलंका में सिंहली, तमिल तथा मुसलमान जातियाँ पाई जाती हैं। 1956 में कानून के द्वारा तमिल को हटाकर सिंहली को श्रीलंका की राजभाषा घोषित कर दिया गया। यहाँ विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में अन्य समुदायों की उपेक्षा करते हुए सिंहलियों को प्राथमिकता दी गई है।

​श्रीलंका में सत्ता की साझेदारी में बहुसंख्यक सिंहली समुदाय अल्पसंख्यक समुदायों पर प्रभुत्व कायम करने के लिए उन्हें सत्ता में हिस्सेदार नहीं बनाता है। इसका परिणाम वहाँ सिंहलियों और तमिलों में टकराव हुआ जो गृहयुद्ध में परिणत हुआ।

​प्रश्न 28. सत्ता का क्षैतिज वितरण किसे कहेंगे? इसकी क्या विशेषताएँ हैं? भारत का उदाहरण देकर समझाइये।

​उत्तर—सत्ता का क्षैतिज वितरण— शासन के विभिन्न अंगों, जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा रहता है। इसे हम सत्ता का क्षैतिज वितरण कहेंगे।

​विशेषताएँ— सत्ता के क्षैतिज वितरण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(1) इसमें सरकार के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं।

(2) ऐसे बँटवारे से यह सुनिश्चित हो जाता है कि कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित उपयोग नहीं कर सकता।

(3) हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है। इससे विभिन्न संस्थाओं के बीच सत्ता का संतुलन बनता है।

​भारत में सत्ता का क्षैतिज वितरण— हमारे देश में कार्यपालिका सत्ता का उपयोग करती है लेकिन यह संसद के अधीन कार्य करती है। न्यायपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका करती है पर न्यायपालिका ही कार्यपालिका पर और विधायिका द्वारा बनाए कानूनों पर अंकुश रखती है। इस व्यवस्था को 'नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था' भी कहते हैं।

​प्रश्न 29. दबाव समूह, राजनीतिक दल तथा अन्य संगठित हित समूह सत्ता में किस प्रकार भागीदारी करते हैं?

​उत्तर— दबाव समूह, राजनीतिक दल तथा अन्य संगठित हित समूह भी अनेक तरह से सत्ता में भागीदारी करते हैं। इसे हम निम्न प्रकार समझ सकते हैं—

​(1) विभिन्न प्रकार के दबाव-समूह और आंदोलनों द्वारा शासन को प्रभावित और नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। विभिन्न तरीकों से वे अपनी बात मनवाते हैं।

​(2) लोकतंत्र में लोगों के सामने सत्ता के दावेदारों के बीच चुनाव का विकल्प होता है। समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यह विकल्प विभिन्न राजनीतिक दलों के रूप में उपलब्ध होता है। राजनीतिक दल सत्ता के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। राजनीतिक दलों की यह आपसी प्रतिद्वंद्विता ही इस बात को सुनिश्चित कर देती है कि सत्ता एक व्यक्ति या समूह के हाथ में न रहे। एक बड़ी समयावधि में देखें तो पाएँगे कि सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है। कई बार सत्ता की यह भागीदारी एकदम प्रत्यक्ष दिखती है क्योंकि दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं।

​(3) इसी प्रकार लोकतंत्र में हम व्यापारी, उद्योगपति, किसान और औद्योगिक मजदूर जैसे कई संगठित हित-समूहों को भी सक्रिय देखते हैं। सरकार की विभिन्न समितियों में सीधी भागीदारी करके या नीतियों पर अपने सदस्य-वर्ग के लाभ के लिए दबाव बनाकर ये समूह भी सत्ता में भागीदारी करते हैं।

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