अध्याय - 1 : विकास
विकास :- किसी वस्तु को बढ़ाना या उसमें सुधार करना विकास कहलाता है।
आर्थिक विकास: - विकास एक व्यापक शब्द है। जैसे: प्रतिव्यक्ति आय का बढ़ना, लोगों के जीवन स्तर में सुधार आना, साक्षरता का बढ़ना, गरीबी का घटना आदि रूपों में इसे समझा जा सकता है।
प्रतिव्यक्ति आय / औसत आय / वास्तविक प्रतिव्यक्ति आय:-किसी क्षेत्र में एक वित्त वर्ष में प्रति व्यक्ति द्वारा अर्जित कुल आय को प्रतिव्यक्ति आय कहा जाता है।
प्रतिव्यक्ति आय को निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है:
प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या
विकास :- किसी वस्तु को बढ़ाना या उसमें सुधार करना विकास कहलाता है।
आर्थिक विकास: - विकास एक व्यापक शब्द है। जैसे: प्रतिव्यक्ति आय का बढ़ना, लोगों के जीवन स्तर में सुधार आना, साक्षरता का बढ़ना, गरीबी का घटना आदि रूपों में इसे समझा जा सकता है।
प्रतिव्यक्ति आय / औसत आय / वास्तविक प्रतिव्यक्ति आय:-किसी क्षेत्र में एक वित्त वर्ष में प्रति व्यक्ति द्वारा अर्जित कुल आय को प्रतिव्यक्ति आय कहा जाता है।
प्रतिव्यक्ति आय को निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है:
प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या
नोट: जब किसी अर्थव्यवस्था में लोगों की वास्तविक प्रतिव्यक्ति आय में अधिक समय के लिए वृद्धि होती है, तो उसे आर्थिक विकास कहा जाता है।
विकास के सिद्धांत या विशेषताएं:-
अलग-अलग लक्ष्य: अलग-अलग देशों में या लोगों के विकास के लक्ष्य भी अलग-अलग होते हैं। जैसे : एक मजदूर के लिए दो वक्त का खाना एवं प्रतिदिन काम का मिलना आवश्यक है। एक विद्यार्थी के लिए परीक्षा में अच्छे अंक लाना विकास है।
परस्पर विरोधी लक्ष्य: एक व्यक्ति के लिए जो विकास है, वह दूसरे के लिए भी विकास हो—यह आवश्यक नहीं। कभी-कभी एक व्यक्ति के लिए विकास तो दूसरे व्यक्ति के लिए विनाश हो सकता है।
उदाहरण: बांध उद्योगपतियों के लिए विकास है, लेकिन किसानों के लिए विनाश है।
मिश्रित लक्ष्य: लोग एक लक्ष्य की बजाय अनेक लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हैं।
उदाहरण: कम वेतन प्राप्त करने वाले अन्य सुविधाओं (जैसे: सुरक्षा, परिवार का माहौल) के कारण घर के पास रहते हैं, जबकि अधिक वेतन मिलने के बाद भी अन्य सुविधाएं न मिलने के कारण लोग घर से दूर जाना पसंद नहीं करते हैं।
राष्ट्रीय विकास:-
यह समझना आवश्यक है कि देश के विकास के विषय में लोगों की विचारधाराएं अलग-अलग या परस्पर विरोधी हो सकती हैं। जब हम किसी वस्तु की तुलना करते हैं तो कुछ समानताएं एवं कुछ अंतर हो सकते हैं। इसलिए परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी तुलना करने का उद्देश्य क्या है।
विश्व बैंक के अनुसार:
वह देश जिसकी प्रतिव्यक्ति आय 12,056 US$ प्रतिवर्ष से अधिक है, उसे समृद्ध / उच्च आय वाला देश माना जाता है। जबकि 2,500 US$ (या उससे कम) प्रतिव्यक्ति आय वाले देश को निम्न आय वाला देश माना जाता है।
विकास के अन्य मापदण्ड:-
सामान्यतः केवल आय वाले मापदण्ड में साक्षरता, शिशु मृत्यु दर, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसलिए आय के अलावा अन्य मापदण्डों का भी उपयोग किया जाता है:
शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate): किसी वर्ष में जन्म लेने वाले 1,000 जीवित बच्चों में से 1 वर्ष की आयु से पहले मरने वाले बच्चों का अनुपात शिशु मृत्यु दर कहलाता है।
उदाहरण: यदि 1 वर्ष में 1,000 बच्चों में से जीवित रहने वाले बच्चों की संख्या 972 है, तो मृत बच्चों की संख्या 28 होगी, जिसे शिशु मृत्यु दर कहा जाएगा।
साक्षरता दर (Literacy Rate): 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग जिन्हें किसी भाषा को पढ़ना, लिखना व बोलना आता हो, उसे साक्षरता दर कहा जाता है। साक्षरता को प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
निवल उपस्थिति अनुपात (Net Attendance Ratio): 14 या 15 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यालय जाने वाले बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत निवल उपस्थिति अनुपात कहलाता है।
विभिन्न राज्यों की तुलना (तालिका) -
विकास के सिद्धांत या विशेषताएं:-
अलग-अलग लक्ष्य: अलग-अलग देशों में या लोगों के विकास के लक्ष्य भी अलग-अलग होते हैं। जैसे : एक मजदूर के लिए दो वक्त का खाना एवं प्रतिदिन काम का मिलना आवश्यक है। एक विद्यार्थी के लिए परीक्षा में अच्छे अंक लाना विकास है।
परस्पर विरोधी लक्ष्य: एक व्यक्ति के लिए जो विकास है, वह दूसरे के लिए भी विकास हो—यह आवश्यक नहीं। कभी-कभी एक व्यक्ति के लिए विकास तो दूसरे व्यक्ति के लिए विनाश हो सकता है।
उदाहरण: बांध उद्योगपतियों के लिए विकास है, लेकिन किसानों के लिए विनाश है।
मिश्रित लक्ष्य: लोग एक लक्ष्य की बजाय अनेक लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हैं।
उदाहरण: कम वेतन प्राप्त करने वाले अन्य सुविधाओं (जैसे: सुरक्षा, परिवार का माहौल) के कारण घर के पास रहते हैं, जबकि अधिक वेतन मिलने के बाद भी अन्य सुविधाएं न मिलने के कारण लोग घर से दूर जाना पसंद नहीं करते हैं।
राष्ट्रीय विकास:-
यह समझना आवश्यक है कि देश के विकास के विषय में लोगों की विचारधाराएं अलग-अलग या परस्पर विरोधी हो सकती हैं। जब हम किसी वस्तु की तुलना करते हैं तो कुछ समानताएं एवं कुछ अंतर हो सकते हैं। इसलिए परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी तुलना करने का उद्देश्य क्या है।
- विश्व में विभिन्न देशों का वर्गीकरण करने के लिए प्रतिव्यक्ति आय का प्रयोग किया जाता है। प्रतिव्यक्ति आय, राष्ट्रीय आय में कुल जनसंख्या का भाग देकर निकाली जाती है।
विश्व बैंक के अनुसार:
वह देश जिसकी प्रतिव्यक्ति आय 12,056 US$ प्रतिवर्ष से अधिक है, उसे समृद्ध / उच्च आय वाला देश माना जाता है। जबकि 2,500 US$ (या उससे कम) प्रतिव्यक्ति आय वाले देश को निम्न आय वाला देश माना जाता है।
विकास के अन्य मापदण्ड:-
सामान्यतः केवल आय वाले मापदण्ड में साक्षरता, शिशु मृत्यु दर, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसलिए आय के अलावा अन्य मापदण्डों का भी उपयोग किया जाता है:
शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate): किसी वर्ष में जन्म लेने वाले 1,000 जीवित बच्चों में से 1 वर्ष की आयु से पहले मरने वाले बच्चों का अनुपात शिशु मृत्यु दर कहलाता है।
उदाहरण: यदि 1 वर्ष में 1,000 बच्चों में से जीवित रहने वाले बच्चों की संख्या 972 है, तो मृत बच्चों की संख्या 28 होगी, जिसे शिशु मृत्यु दर कहा जाएगा।
साक्षरता दर (Literacy Rate): 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग जिन्हें किसी भाषा को पढ़ना, लिखना व बोलना आता हो, उसे साक्षरता दर कहा जाता है। साक्षरता को प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
निवल उपस्थिति अनुपात (Net Attendance Ratio): 14 या 15 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यालय जाने वाले बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत निवल उपस्थिति अनुपात कहलाता है।
विभिन्न राज्यों की तुलना (तालिका) -
अन्य मापदण्ड :- आय के अलावा अन्य मापदण्डों को भी देश के विकास की तुलना के लिए उपयोग में लिया जाता है। जैसे:- साक्षरता, शिशु मृत्यु दर, निवल उपस्थिति अनुपात आदि।
Note :- UNDP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) के द्वारा प्रकाशित HDI (मानव विकास प्रतिवेदन) रिपोर्ट विभिन्न देशों की तुलना शैक्षिक स्तर, प्रति व्यक्ति आय तथा स्वास्थ्य के आधार पर करती है।
⚖️ BMI (शरीर द्रव्यमान सूचकांक)
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय व्यक्ति की लंबाई तथा वजन के आधार पर स्वास्थ्य स्थिति बताता है, जिसे निम्न सूत्र के द्वारा ज्ञात किया जाता है:
BMI = वजन (kg)÷ लम्बाई( in m2)
BMI < 18.5 से कम : कुपोषित
BMI 18.5 - 24.9 : स्वस्थ है
BMI > 25 से अधिक : अधिक वजन (अतिभार)
सार्वजनिक सुविधाए:- वे सुविधाएं जो एक देश की सरकार अपने नागरिकों को प्रदान करती है, उन्हें सार्वजनिक सुविधाएं कहा जाता है।
उदाहरण: सरकारी विद्यालय, सरकारी अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन, राशन की दुकानें आदि।
आवश्यकता एवं विशेषताएं:- यह आवश्यक नहीं कि जेब में रखा रुपया वे सभी वस्तुएं और सुविधाएं खरीद सके जिनकी आपको बेहतर जीवन जीने के लिए आवश्यकता है। उदाहरण: पैसों से प्रदूषण-मुक्त वातावरण नहीं खरीदा जा सकता। उदाहरण: केवल पैसों से संक्रामक बीमारियों से नहीं बचा जा सकता (जब तक कि पूरा समाज प्रयास न करे)।
सरकार द्वारा सुविधाएं प्रदान करने के तरीके:
विकास की धारणीयता का अर्थ है—पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास करना, अर्थात् वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भावी (आने वाली) पीढ़ी के लिए संसाधनों का संरक्षण करना धारणीय विकास कहलाता है।
धारणीय विकास की विशेषताएं:
Note :- UNDP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) के द्वारा प्रकाशित HDI (मानव विकास प्रतिवेदन) रिपोर्ट विभिन्न देशों की तुलना शैक्षिक स्तर, प्रति व्यक्ति आय तथा स्वास्थ्य के आधार पर करती है।
⚖️ BMI (शरीर द्रव्यमान सूचकांक)
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय व्यक्ति की लंबाई तथा वजन के आधार पर स्वास्थ्य स्थिति बताता है, जिसे निम्न सूत्र के द्वारा ज्ञात किया जाता है:
BMI = वजन (kg)÷ लम्बाई( in m2)
BMI < 18.5 से कम : कुपोषित
BMI 18.5 - 24.9 : स्वस्थ है
BMI > 25 से अधिक : अधिक वजन (अतिभार)
सार्वजनिक सुविधाए:- वे सुविधाएं जो एक देश की सरकार अपने नागरिकों को प्रदान करती है, उन्हें सार्वजनिक सुविधाएं कहा जाता है।
उदाहरण: सरकारी विद्यालय, सरकारी अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन, राशन की दुकानें आदि।
आवश्यकता एवं विशेषताएं:- यह आवश्यक नहीं कि जेब में रखा रुपया वे सभी वस्तुएं और सुविधाएं खरीद सके जिनकी आपको बेहतर जीवन जीने के लिए आवश्यकता है। उदाहरण: पैसों से प्रदूषण-मुक्त वातावरण नहीं खरीदा जा सकता। उदाहरण: केवल पैसों से संक्रामक बीमारियों से नहीं बचा जा सकता (जब तक कि पूरा समाज प्रयास न करे)।
सरकार द्वारा सुविधाएं प्रदान करने के तरीके:
- सरकार लोगों से टैक्स (कर) लेकर सुविधाएं उपलब्ध करवाती है।
- सरकार निजी कंपनियों की सहायता से भी सार्वजनिक सुविधाएं प्रदान करती है।
- यह सुविधाएं सभी के द्वारा मिलकर उपयोग में ली जाती हैं, अतः यह सस्ती होती हैं।
- इससे समाज के सभी वर्गों और लोगों का विकास होता है।
- गरीब से गरीब व्यक्ति भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।
- विकास के अन्य मापदण्डों जैसे—शिक्षा, चिकित्सा, शिशु मृत्यु दर आदि में सुधार होता है।
विकास की धारणीयता का अर्थ है—पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास करना, अर्थात् वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भावी (आने वाली) पीढ़ी के लिए संसाधनों का संरक्षण करना धारणीय विकास कहलाता है।
धारणीय विकास की विशेषताएं:
- संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
- नवीकरणीय संसाधनों (जैसे- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा) का अधिक उपयोग करना।
- समाप्त होने वाले गैर-नवीकरणीय संसाधनों के स्थान पर वैकल्पिक संसाधनों की खोज करके उनका उपयोग करना।
- संसाधनों के पुनः उपयोग (Reuse) एवं चक्रीय प्रक्रिया (Recycling) को बढ़ावा देना।
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