संघवाद

        अध्याय 2 संघवाद

संघवादः- लोकतंत्र में शासन का विभिन्न स्तरो मे बटवारा करना ही संघवाद है।

​संघवाद क्या है?:- संघीय शासन व्यवस्था में सरकार केन्द्र व राज्य स्तर में बंट जाती है। जिसमे केन्द्र सरकार सम्पुर्ण (राज्य स्तर मे) देश मे एवं राज्य सरकार राज्यो मे शासन करती है। दोनो सरकारे अपने-२ स्तर पर स्वंतंत्र रूप से कार्य करती है, यहः आपसी सहयोग से मिल-जुलकर कार्य करती है। इस शासन व्यवस्था मे सर्वोच्च सटा केन्द्र सरकार के पास होती है।

​संघीय व्यवस्था की विशेषताएं:

​इसमे सरकार के दो स्तर होते है। 1) केन्द्र सरकार 2) राज्य सरकार

​दोनो सरकारो के पास प्रशासन का अपना -२ अधिकार क्षेत्र होता है।

​दोनो स्तर कि सरकार के राजस्व स्त्रोत भी अलग-२ है।

​सविधान के मौलिक प्रावधान को बद‌लने के लिए दोनो सरकार की सहमति आवश्यक होती है।

​न्यायपालिका को दोनो सरकारो के कार्यों कि व्याख्या करने का अधिकार होगा।

​संघीय सरकार देश की एकता, अखंडता व लोगो को सुरक्षा प्रदान करती है।

​इसव्यवस्था में क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान किया जाता है।

​केन्द्र एवं राज्य सरकार के बिच सता का बंटवारा:-

इसमें दो या दो से अधिक राज्य मिलकर एक बड़ी इकाई के रूप मे स्वतंत्र राष्ट्र का निमाण करते है। इसमे दोनो राज्य अपनी संप्रभुत को साथ करते है। तथा संघ बनाते है। जैसे :- USA एवं ऑस्ट्रेलिया मे केन्द्र व राज्यो को समान अधिकार दिए गए है।

​दुसरे रूप में राज्यो का गठन आंतरिक विभिन्नता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, तथा केन्द्र व राज्यों के बिच सता का विभाजन करते हुए केन्द्र कि अधिक ताकतवर बनाया गया है। इस व्यवस्था में सभी राज्यो को समान अधिकार है। लेकिन विशेष परिस्थिति में किसी राज्य को विशेष अधिकार दिए जा सकते है, जैसे:- भारत एवं श्री लंका मे।

​भारतीय संघीय व्यवस्थाः - भारतीय संविधान ने भारत को राज्यो का संघ कहा है। अर्थात भारत में दो स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रावधान है। संघ सरकार व राज्य सरकार। संघ सरकार संपूर्ण देश मे शासन करती है। जबकि राज्य सरकार केन्द्र सरकार के अधीन कार्य करती है। देश मे कुछ समय बाद पंचायत एवं नगर पालिका के रूप मे तीसरा स्तर जोड़ा गया था। केन्द्र व राज्य सरकार से शक्तियाँ प्राप्त होती है।

​सविधान में संघ व राज्यों के बीच शक्तियो का बटवारा :-

​संघीय / संघ सुची:- इल्स सुची पर कानुन बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार का है, यह कानुन पूरे देश के लिए बनाए जाते है। इसमे रक्षा, बैकं, संचार, रेलवे, विदेशी मामले आदि राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल होते है।

​राज्य सुची :- इस सुची के विषयो पर कानुन बनाने का अधिकार राज्य सरकार के विषयो का होता है। इसमें व्यापार, कृषि, सिंचाई आदि विषयो को शामिल किया जाता है।

​समवर्ती सूचीः- इस सूची के विषय पर कानुन बनाने का अधिकार केन्द्र व राज्य सरकार दोनो का है। लेकिन टकराव की स्थिती में केन्द्र सरकार के द्वारा बनाए गए कानुन मान्य होते है। इसमे शिक्षा, चिकित्सा, वन विवाह, उतराधिकार के नियम आदि को शामिल किया जाता है।

​Note:-​ऐसे विषय जो किसी भी सूची में शामिल नहीं है, वो केन्द्र सरकार के अधीन होते है।

​भारतीय संघ में सभी राज्यो को सम्मान दर्जा न देकर कुछ राज्यो विशेष दर्जा दिया गया है। जैसे:- असम, नागालैण्ड, अरुणाचलप्रदेश तथा मिजोएम के लिए विशेष सामाजिक परिस्थिति के आधार पर विशेष प्रावधान किए गए है।

​(जिसे राज्य) ऐसे राज्य जिनको स्वतंत्र रखना संभव नही था उन्हे केन्द्रशासीत प्रदेश कहा जाता है। जिन पर केन्द्र सरकार शासन करती है।

​केन्द्र एवं राज्य सरकार के बीच सता के बटवारे में परिवर्तन करने के लिए संसद के दोनो सदनो के 2/3 बहुमत तथा आधे से ज्यादा राज्यो की विधान सभा ही मजुरी आवश्यक होती है।

​सता के बंटवारे से संबंधित किसी विवाद का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय / उच्च न्यायालय के द्वारा किया जाता है।

​संघीय व्यवस्था कैसे चलती है १:- संघीय व्यवस्था के संचालन के लिए सवैधानिक प्रावधान आवश्यक है। भारत मे संघीय व्यवस्था की सफलता का मुख्य योगदान लोकतांत्रिक राजनीति को है। क्योकि इससे संघवाद की भावना, विविधता का आदर एवं उच्च आदर्श स्थापित हुए है।

​भाषायी राज्यः- आजादी के बाद भारत में अनेक राज्य बनाए गए तथा कुछ राज्यों की सीमाएँ, नाम एवं क्षेत्र मे परिवर्तन किया गया है, कुछ राज्यो का गठन भाषा के आधार पर भी किया गया जैसे :- उत्तराखण्ड, नागालैण्ड, झारखण्ड आदि। भाषा के आधार पर राज्यो के गठन से देश के टूटने का खतरा बना रहता है, लेकिन कुछ विद्वानों के अनुशार भाषा के आधार पर राज्यो के गठन से देश की एकता एवं प्रशासन चलाना आसान होता है।

​भाषा नीति :- भारतीय सविधान मे किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नही दिया गया। हिन्दी को केवल राजभाषा माना गया है। जो देशके 40% लोगो के द्वारा बोली जाती है। भारत के सविधान मे 22 भाषाए अनुसुचित है, अत: उम्मीदवार किसी भी भाषा मे परिक्षा दे सकता है। लेकिन विभिन्न राज्यों का अधिंकाश कार्य अपनी राजभाषा होता है।

​केन्द्र और राज्य के मध्य संबंध :- सन् 1990 के बाद अनेक राज्यो मे केन्द्रीय दलों का उद‌य हुआ तथा लोकसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने का कारण क्षेत्रिय दलो के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनानी पड़ी अतः राज्य सरकार को मन-माने ढंग में भंग करना केन्द्र सरकार के लिए कठिन हो गया। इस प्रकार संघीय व्यवस्था मे सता की साझेदारी सविधान लागु होने के बाद अधिक प्रभावित हुई।

​भारत में विकेन्द्रीकरण:- जब केन्द्र एवं राज्य सरकार की शक्तियाँ स्थानीय सरकार को दी जाती है, तो उसे सटा का विकेन्द्रीकरण कहते है। विकेन्द्रीकरण से अनेक समस्याओ का समाधान स्थानीय स्तर पर ही कर दिया जाता है, क्योकि स्थानीय अपनी समस्याओ की जानकारी अधिक होती है, अत: 1992 मे भारतीय सविंधान में संशोधन करके सता का तीसरा स्तर स्थानीय स्वशासन जोड़ा गया जिसमे निम्न प्रावधान किए गए:-

​स्थानीय स्वशासन में महिलाओं के लिए 1/3 सीटे आरक्षित की गई।

​इनके चुनाव राज्य, निर्वाचन आयोग के द्वारा करवाए जाते हैं।

​स्थानीय स्वशासन मे अनुसुचित जाती, अनुसूचित जनजाति पिछड़े जाति के लिए सिटे आरक्षित कि गई हैं।

​इसमें निकायों के चुनाव संवैधानिक रूप से करवाना अनिवार्य है।

​स्थानीय स्वशासन में महिलाओ कि भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे लोकतंत्र और अधिक शविशाली बना है।

​स्थानीय स्वशासन की पंचायती राज के नाम से जाना जाता है।

​प्रत्येक गाँव मे एक ग्राम पंचायत होती है। जिसके सदस्य वार्ड पंच तथा अध्यक्ष को संरपच कहा जाता है। इनका चुनाव वयस्क मताधिकार के द्वारा गाँव के सदस्य हि करते है। इनके उपर पंचायत समीति होती है। जिसे मंडल पंचायत कहा जाता है। मंडल पंचायत के ऊपर जिला परिषद का गठन होता है।

  • ​बड़े शहरों में नगरपालिका व नगरनिगम का गठन होता है। नगरनिगम के पदाधिकारी को मेयर, कहाँ जाता है।
  • ​अधिकार क्षेत्र:- ऐसा दायरा जिस पर किसी व्यक्ति का अधिकार हो उसे अधिकार क्षेत्र कहते है।
  • ​गठबंधन सरकार :- एक से अधिक राजनैतिक दलो के द्वारा मिलकर बनाई गयी सरकार, गठबंधन सरकार कहलाती है
  • ​भारत के सविंधान मे अनुसुचित भाषा -22, हिन्दी 40% [लोग] व अग्रेजी 0.02% लोगो के द्वारा बोली जाती है।
  • ​भारत का परमाणु परिक्षण क्षेत्र:- पोकरण (जैसलमेर) ।
  • ​राज्य पनर्गठन आयोग :- 1 नवम्बर 1956 को हुआ।

बहुविकल्पीय प्रश्न (उत्तर सहित)
​1. विवाह, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे विषय संघीय व्यवस्था की किस सूची में आते हैं? 
(अ) संघ सूची
(ब) राज्य सूची
(स) समवर्ती सूची
(द) अवशिष्ट विषय
उत्तर: (स) समवर्ती सूची
​2. वर्तमान में बेल्जियम में किस प्रकार की सरकार है—
(अ) संघात्मक
(ब) एकात्मक
(स) तानाशाही
(द) राजतंत्रात्मक
उत्तर: (अ) संघात्मक
​3. निम्नलिखित में किस देश की सरकार एकात्मक है?
(अ) भारत
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
(स) श्रीलंका
(द) बेल्जियम
उत्तर: (स) श्रीलंका
​4. निम्नलिखित में जो संघ सरकार की विशेषता नहीं है, वह है—
(अ) दो स्तर की सरकारें
(ब) दोनों सरकारों को संविधान द्वारा शक्तियाँ प्राप्त
(स) राज्य सरकार को शक्तियाँ केन्द्र सरकार से प्राप्त
(द) दोनों सरकारों के अपने अलग-अलग अधिकार क्षेत्र
उत्तर: (स) राज्य सरकार को शक्तियाँ केन्द्र सरकार से प्राप्त
​5. साथ आकर (Coming together) संघ बनाने का उदाहरण है—
(अ) भारत
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
(स) बेल्जियम
(द) स्पेन
उत्तर: (ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
​6. निम्न में से कौनसा राज्य साथ रहकर (Holding together) संघ का उदाहरण नहीं है?
(अ) भारत
(ब) बेल्जियम
(स) स्पेन
(द) स्विट्जरलैंड
उत्तर: (द) स्विट्जरलैंड (नोट: स्विट्जरलैंड 'साथ आकर' (Coming together) संघ का उदाहरण है)
​7. भारतीय संविधान में मौलिक रूप से कितने स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रावधान किया गया था?
(अ) एक-स्तरीय
(ब) दो-स्तरीय
(स) त्रि-स्तरीय
(द) चार-स्तरीय
उत्तर: (ब) दो-स्तरीय (मूल संविधान में केवल केंद्र और राज्य दो स्तर थे; तीसरा स्तर/पंचायत बाद में जोड़ा गया)
​8. भारतीय संविधान में 'पुलिस' किस सूची के अन्तर्गत है?
(अ) संघ सूची
(ब) राज्य सूची
(स) समवर्ती सूची
(द) अवशिष्ट विषय
उत्तर: (ब) राज्य सूची
​9. संचार विषय किस सूची में शामिल है?
(अ) संघ सूची
(ब) राज्य सूची
(स) समवर्ती सूची
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (अ) संघ सूची
​10. अनुच्छेद 371 के तहत विशेष शक्तियों का लाभ उठाने वाला राज्य नहीं है—
(अ) असम
(ब) नागालैंड
(स) उत्तराखंड
(द) मिजोरम
उत्तर: (स) उत्तराखंड
​11. निम्न में से केन्द्रशासित प्रदेश है—
(अ) चंडीगढ़
(ब) दिल्ली
(स) लक्षद्वीप
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (द) उपर्युक्त सभी
​12. ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को क्या कहा जाता है?
(अ) सरपंच
(ब) पंच
(स) जिला प्रमुख
(द) मेयर
उत्तर: (अ) सरपंच
​13. जिस देश में प्रान्तीय सरकारों को अधिकार केन्द्र सरकार द्वारा दिये जाते हैं और केन्द्र सरकार उन अधिकारों को प्रान्तीय सरकारों से वापस भी ले सकती है, ऐसी सरकार को कहते हैं—
(अ) संघात्मक सरकार
(ब) एकात्मक सरकार
(स) संसदात्मक सरकार
(द) अध्यक्षात्मक सरकार
उत्तर: (ब) एकात्मक सरकार
​14. बेल्जियम ने एकात्मक शासन की जगह संघात्मक सरकार व्यवस्था को कब अपनाया?
(अ) 1983 में
(ब) 1883 में
(स) 1993 में
(द) 2003 में
उत्तर: (स) 1993 में
​15. दुनिया के 193 देशों में से संघीय व्यवस्था वाले देशों की संख्या है—
(अ) 100
(ब) 93
(स) 40
(द) 25
उत्तर: (द) 25
​16. निम्नलिखित में से किस लोकतांत्रिक देश में संघीय व्यवस्था नहीं है?
(अ) इंग्लैंड
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
(स) भारत
(द) स्विट्जरलैंड
उत्तर: (अ) इंग्लैंड
​17. विश्व के संघीय व्यवस्था वाले देशों में दुनिया की कितनी प्रतिशत जनसंख्या रहती है?
(अ) 20 प्रतिशत
(ब) 40 प्रतिशत
(स) 25 प्रतिशत
(द) 30 प्रतिशत
उत्तर: (ब) 40 प्रतिशत
​18. भारतीय संविधान में निम्न में से कौन-सा विषय संघ सूची में रखा गया है?
(अ) प्रतिरक्षा
(ब) पुलिस
(स) व्यापार-वाणिज्य
(द) कृषि
उत्तर: (अ) प्रतिरक्षा
​19. निम्न में से कौन-सा विषय समवर्ती सूची का नहीं है?
(अ) शिक्षा
(ब) वन
(स) सिंचाई
(द) विवाह
उत्तर: (स) सिंचाई
​20. भारत में केन्द्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है—
(अ) संघ सूची के विषयों पर।
(ब) राज्य सूची के विषयों पर।
(स) समवर्ती सूची के विषयों पर।
(द) अवशिष्ट विषयों पर।
उत्तर: (स) समवर्ती सूची के विषयों पर।
​21. भारत में सर्वाधिक कौन-सी भाषा बोली जाती है?
(अथवा)
भारत में जिस भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया है, वह है—
(अ) मराठी
(ब) तेलुगु
(स) हिन्दी
(द) बांग्ला
उत्तर: (स) हिन्दी
​22. संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषाओं की संख्या है— 
(अ) 21
(ब) 20
(स) 22
(द) 24
(अथवा)
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को रखा गया है? 
(अ) 20
(ब) 21
(स) 22
(द) 23
उत्तर: (स) 22
​23. केन्द्र एवं राज्य के मध्य विधायी अधिकारों को कितने हिस्सों में बाँटा गया है? 
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच
उत्तर: (ब) तीन
​24. निम्न में से कौन-सा विषय संविधान में शक्ति वितरण की किसी भी सूची में नहीं है?
(अ) व्यापार
(ब) वैदेशिक सम्बन्ध
(स) शिक्षा
(द) कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर
उत्तर: (द) कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर
​25. नगर निगम के अध्यक्ष को कहा जाता है—
(अ) सभापति
(ब) सरपंच
(स) मेयर
(द) राज्यपाल
उत्तर: (स) मेयर
​26. शासन की जिस व्यवस्था में सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है, उसे कहा जाता है—
(अ) एकात्मक सरकार
(ब) संघात्मक सरकार
(स) सामुदायिक सरकार
(द) राजतंत्रीय सरकार
उत्तर: (ब) संघात्मक सरकार
​27. भारतीय संविधान में 'कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर' निम्न में से किस विकल्प में आता है?
(अ) संघ सूची
(ब) राज्य सूची
(स) समवर्ती सूची
(द) अवशिष्ट विषय (बाकी बचे)
उत्तर: (द) अवशिष्ट विषय (बाकी बचे)
​28. निम्नांकित में से संघ सूची का विषय नहीं है— 
(अ) राष्ट्रीय सुरक्षा
(ब) विदेशी मामले
(स) बैंकिंग
(द) शिक्षा
उत्तर: (द) शिक्षा
​29. भारत में विकेंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया—
(अ) 1971
(ब) 1992
(स) 1999
(द) 2005
उत्तर: (ब) 1992
​30. 'विदेशी मामले' किस सूची से संबंधित विषय है? 
(अ) संघ सूची
(ब) राज्य सूची
(स) समवर्ती सूची
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (अ) संघ सूची

प्रश्न 1. भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में कितनी भाषाओं का उल्लेख है?
​उत्तर: भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 भाषाओं का उल्लेख है।
​प्रश्न 2. संघात्मक शासन प्रणाली में अधिकारों का विभाजन किसके बीच होता है?
​उत्तर: संघात्मक शासन प्रणाली में अधिकारों का विभाजन केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच होता है।
​प्रश्न 3. नगर निगम के अध्यक्ष को क्या कहते हैं?
​उत्तर: नगर निगम के अध्यक्ष को मेयर (महापौर) कहते हैं।
​प्रश्न 4. शासन की किस व्यवस्था में सरकार विभिन्न स्तरों वाली होती है?
​उत्तर: संघीय व्यवस्था (संघवाद) में सरकार दो या दो से अधिक स्तरों वाली होती है।
​प्रश्न 5. संविधान एवं विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार किसके पास होता है?
​उत्तर: यह अधिकार न्यायालय (न्यायपालिका/सर्वोच्च न्यायालय) के पास होता है।
​प्रश्न 6. रेल व संचार किस सूची के विषय हैं?
​उत्तर: रेल और संचार संघ सूची के विषय हैं।
​प्रश्न 7. शिक्षा, वन व विवाह किस सूची के विषय हैं?
​उत्तर: शिक्षा, वन और विवाह समवर्ती सूची के विषय हैं।
​प्रश्न 8. केंद्र व राज्य सरकारों से कुछ शक्तियाँ लेकर स्थानीय सरकार में बाँटना क्या कहलाता है?
​उत्तर: इसे सत्ता का विकेंद्रीकरण कहते हैं।
​प्रश्न 9. श्रीलंका में कौन-सी शासन व्यवस्था है?
​उत्तर: श्रीलंका में एकात्मक शासन व्यवस्था है।
​प्रश्न 10. भारत में संघवाद का रूप कैसा है? स्पष्ट कीजिए।
​उत्तर: भारत में संघवाद के रूप की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
​राज्यों का संघ: भारत का संविधान भारत को "राज्यों का संघ" घोषित करता है।
​त्रि-स्तरीय शासन व्यवस्था: भारत में तीन स्तरों की सरकारें हैं—केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय स्वशासन (पंचायत/नगरपालिका)।
​शक्तियों का तीन सूचियों में विभाजन: संविधान में शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है:
​संघ सूची: राष्ट्रीय महत्व के विषय (उदा. रक्षा, विदेशी मामले)।
​राज्य सूची: स्थानीय/प्रांतीय महत्व के विषय (उदा. पुलिस, कृषि)।
​समवर्ती सूची: साझे हित के विषय (उदा. शिक्षा, वन)।
​स्वतंत्र न्यायपालिका: भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र और सर्वोच्च है, जो केंद्र व राज्यों के बीच विवादों का निपटारा करती है।
​प्रश्न 11. शासन के संघीय व एकात्मक स्वरूपों में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।
​उत्तर: संघीय शासन व्यवस्था:
संघीय शासन व्यवस्था में दो या दो से अधिक स्तरों की सरकारें होती हैं, जो स्वतंत्र रूप से अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में कार्य करती हैं। इस व्यवस्था में प्रांतीय या राज्य सरकारें अपने कार्यों के लिए केंद्र सरकार के प्रति जिम्मेदार नहीं होती हैं। इन सरकारों को अपनी शक्तियाँ सीधे संविधान से प्राप्त होती हैं, जिसके तहत संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों और विषयों का स्पष्ट विभाजन किया गया होता है।  
​एकात्मक शासन व्यवस्था:
इसके विपरीत, एकात्मक शासन व्यवस्था में शासन का केवल एक ही स्तर होता है या फिर प्रांतीय इकाइयाँ केंद्र सरकार के अधीन होकर कार्य करती हैं। इस प्रणाली में प्रांतीय सरकारें अपने सभी कार्यों के लिए केंद्र सरकार के प्रति ही जिम्मेदार होती हैं। इसके अलावा, एकात्मक व्यवस्था में केंद्र और प्रांतीय सरकारों के बीच शक्तियों व विषयों का कोई अलग से संवैधानिक विभाजन नहीं होता है।  

प्रश्न 12. संविधान में केंद्र व राज्यों के मध्य शक्तियों का बंटवारा किस प्रकार से किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
​उत्तर: संविधान में केंद्र और राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है:
​संघ सूची: इसमें राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल हैं (जैसे- प्रतिरक्षा, विदेश नीति, बैंकिंग, संचार और मुद्रा)। इन विषयों पर केवल केंद्र सरकार ही कानून बना सकती है।
​राज्य सूची: इसमें प्रांतीय और स्थानीय महत्व के विषय शामिल हैं (जैसे- पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि और सिंचाई)। इन विषयों पर राज्य सरकार कानून बनाती है।
​समवर्ती सूची: इसमें ऐसे विषय शामिल हैं जो केंद्र और राज्य दोनों के साझे हित में हैं (जैसे- शिक्षा, वन, मजदूर संघ, विवाह और गोद लेना)। इन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन विवाद की स्थिति में केंद्र का कानून ही मान्य होता है।
​प्रश्न 13. सत्ता के विकेंद्रीकरण से क्या अभिप्राय है? विकेंद्रीकरण के पीछे बुनियादी सोच क्या है?
​उत्तर:
​अभिप्राय: जब केंद्र और राज्य सरकारों से कुछ शक्तियाँ लेकर स्थानीय स्तर की सरकारों (ग्राम पंचायत, नगर पालिका आदि) को दी जाती हैं, तो इसे सत्ता का विकेंद्रीकरण कहते हैं।
​इसके पीछे बुनियादी सोच:
​स्थानीय समाधान: अनेक समस्याओं और मुद्दों का समाधान स्थानीय स्तर पर सबसे अच्छे और प्रभावी तरीके से हो सकता है।
​स्थानीय जानकारी: स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र की ज़रूरतों और समस्याओं की बेहतर समझ होती है तथा उन्हें पता होता है कि धन को कहाँ और कैसे कुशलतापूर्वक खर्च किया जाए।
​जन-भागीदारी: इससे स्थानीय स्तर पर फ़ैसले लेने में आम नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित होती है, जो कि लोकतंत्र का मूल आधार है।
​प्रश्न 14. संघवाद क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
​उत्तर:
​संघवाद: लोकतंत्र में शासन की शक्तियों को केंद्र और उसकी विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों (राज्यों/प्रांतों) के बीच बांटना ही संघवाद कहलाता है।
​संघवाद की मुख्य विशेषताएँ:
​सरकार के दो या अधिक स्तर: इसमें शासन प्रणाली दो या तीन स्तरों (केंद्र, राज्य और स्थानीय) वाली होती है।
​अलग-अलग अधिकार क्षेत्र: एक ही नागरिक समूह पर शासन करने के बावजूद, अलग-अलग स्तर की सरकारों का कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का अपना-अपना अधिकार क्षेत्र संविधान द्वारा निर्धारित होता है।
​न्यायालय की सर्वोच्चता: संविधान और सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार न्यायपालिका के पास होता है। विवाद की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय मध्यस्थ की भूमिका निभाता है।
​संवैधानिक संशोधन में सहमति: संविधान के मौलिक प्रावधानों में बदलाव केवल किसी एक स्तर की सरकार द्वारा नहीं किया जा सकता; ऐसे बदलावों के लिए दोनों स्तरों की सरकारों की सहमति आवश्यक होती है।

प्रश्न 15. भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती-जुलती एक विशेषता और उससे अलग एक विशेषता को बताएँ।
​उत्तर— भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती-जुलती एक विशेषता यह है कि दोनों में राज्य सरकारें केन्द्रीय सरकार के अधीन नहीं हैं तथा अलग विशेषता यह है कि भारत में केन्द्रीय सरकार में मंत्रियों की संख्या बेल्जियम की तरह भाषायी समुदायों के आधार पर निर्धारित नहीं की गई है।
​प्रश्न 16. शासन के संघीय और एकात्मक स्वरूपों में क्या-क्या मुख्य अंतर है? इसे उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करें।
​उत्तर—
(1) संघीय शासन व्यवस्था में दो स्तर पर सरकारें होती हैं और सत्ता के इन दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर अपना कार्य करती हैं। इसमें राज्य (प्रांतीय) सरकारों को भी शक्तियाँ संविधान से प्राप्त होती हैं। जबकि एकात्मक शासन व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और प्रांतीय सरकारें उसके अधीन होकर काम करती हैं।
​(2) एकात्मक शासन में केन्द्रीय सरकार प्रांतीय सरकारों को आदेश दे सकती है लेकिन संघीय व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार राज्य या प्रांतीय सरकार को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती।
​(3) एकात्मक शासन में प्रांतीय सरकारें अपने कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार के प्रति जिम्मेदार होती हैं, जबकि संघीय व्यवस्था में प्रांतीय सरकारें अपने कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार के प्रति जिम्मेदार नहीं होती हैं। इसमें दोनों ही सरकारें अपने-अपने स्तर पर लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं।
​(4) संघीय व्यवस्था में संघ और राज्य सरकारों के बीच विषयों का विभाजन होता है, एकात्मक व्यवस्था में विषयों का विभाजन नहीं होता है।
​उदाहरण के लिए, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील आदि देशों में संघीय शासन व्यवस्था को अपनाया है, लेकिन फ्रांस, ब्रिटेन, जापान आदि देशों में एकात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया है।
​प्रश्न 17. 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के महत्वपूर्ण अंतरों को बताएँ।
​उत्तर— भारत में 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्वपूर्ण अंतर निम्नलिखित हैं—
​(1) संवैधानिक मान्यता— सन् 1992 से पहले स्थानीय शासन को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं थी, लेकिन 1992 के संशोधनों के बाद स्थानीय शासन संस्थाओं को संविधान की 11वीं तथा 12वीं अनुसूचियों में शामिल करके इन्हें संवैधानिक मान्यता प्रदान कर दी गई है।
​(2) महिलाओं को आरक्षण की व्यवस्था— 1992 के पहले स्थानीय शासन संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं थी, जबकि 1992 के संविधान संशोधनों के बाद स्थानीय शासन संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई पदों पर आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

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