राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएं

 अध्याय: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएं (सारांश)

​1. परिवहन और इसके साधन

​परिवहन: किसी व्यक्ति या वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना परिवहन कहलाता है।

​व्यापारी: वह व्यक्ति जो किसी उत्पाद को परिवहन के माध्यम से उपभोक्ता तक पहुँचाता है।

​वर्गीकरण: परिवहन के मुख्य तीन साधन हैं—स्थल, जल और वायु परिवहन।

​2. स्थल परिवहन (सड़क एवं रेल)

​A. सड़क परिवहन

​भारत में लगभग 56 लाख किमी सड़कें हैं।

​सड़कों का महत्त्व:

​निर्माण लागत कम आती है।

​ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भी बनाई जा सकती हैं।

​कम दूरी, कम व्यक्तियों और कम सामान के लिए सुगम हैं।

​घर-घर तक सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं तथा अन्य परिवहन साधनों को जोड़ने का काम करती हैं।

​सड़कों का वर्गीकरण:

​स्वर्णिम चतुर्भुज महाराजमार्ग: 6-लेन राजमार्ग जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ता है।

​उत्तर-दक्षिण गलियारा: श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ता है (सबसे लंबा राजमार्ग)।

​पूर्व-पश्चिम गलियारा: सिलचर (असम) को पोरबंदर (गुजरात) से जोड़ता है।

​इसका रख-रखाव NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) करता है।

​राष्ट्रीय राजमार्ग (NH): दूर-दराज के भागों को जोड़ते हैं। देख-रेख CPWD करता है।

​राज्य राजमार्ग: राज्य की राजधानी को जिला मुख्यालयों से जोड़ते हैं। देख-रेख PWD करता है।

​जिला सड़कें: जिला मुख्यालय को विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों से जोड़ती हैं। देख-रेख जिला परिषद करती है।

​अन्य सड़कें: गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं (प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना)।

​सीमा सड़कें: सीमावर्ती क्षेत्रों में BRO (सीमा सड़क संगठन, स्थापना 1960) द्वारा बनाई जाती हैं।

​सड़क निर्माण सामग्री के आधार पर: कच्ची सड़क (मिट्टी-कंक्रीट) और पक्की सड़क (सीमेंट, तारकोल — बारहमासी सड़कें)।

​विशेष नोट (अटल टनल): यह विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग (9.02 किमी) है, जो मनाली को लाहौल-स्पीति से जोड़ती है। इसका निर्माण BRO द्वारा किया गया है।

​B. रेल परिवहन

​भारत में पहली रेलगाड़ी 1853 में मुंबई से ठाणे (पुणे) के बीच 34 किमी चली थी।

​भारत में कुल रेलमार्ग की लंबाई 68,442 किमी है।

​गेज/लाइन के प्रकार:

​बड़ी लाइन (1.676 m)

​मीटर लाइन (1.00 m)

​छोटी लाइन (0.762 m / 0.610 m)

​समस्याएँ: बिना टिकट यात्रा, रेल संपत्ति को नुकसान/चोरी, अनावश्यक जंजीर खींचना और ट्रेनों का देरी से चलना।

​3. पाइपलाइन परिवहन

​यह परिवहन का नया साधन है, जिसका उपयोग कच्चा तेल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस आदि तरल/गैस पदार्थों के लिए होता है। ठोस पदार्थों को भी घोल (Slurry) में बदलकर परिवहन किया जाता है।

​प्रमुख पाइपलाइनें:

​असम (गुवाहाटी) से बरौनी (बिहार) और कानपुर (U.P.) तक।

​सलाया (गुजरात) से जालंधर (पंजाब) तक।

​हज़ीरा (गुजरात) से जगदीशपुर (U.P.) और विजयपुर (M.P.) (HVJ पाइपलाइन) तक।

​4. जल परिवहन

​यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है और भारी वस्तुओं के परिवहन के लिए उपयुक्त है। भारत में 14,500 किमी आंतरिक जलमार्ग है।

​प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्ग (NW):

​NW-1: गंगा नदी पर इलाहाबाद से हलदिया (1620 किमी)।

​NW-2: ब्रह्मपुत्र नदी पर सदिया से धुबरी (891 किमी)।

​NW-3: केरल में वेस्ट-कोस्ट केनाल (कोलम्ब् से कोट्टापुरम - 205 किमी)।

​NW-4: गोदावरी व कृष्णा नदी का विस्तार (1078 किमी)।

​NW-5: ब्राह्मणी और महानदी पर विस्तार (588 किमी)।

​प्रमुख समुद्री पत्तन (समुद्र तट रेखा: 7,516.6 किमी):

​भारत में 12 बड़े और 200 से अधिक छोटे पत्तन हैं, जो देश के 95% व्यापार को संभालते हैं।

​कांडला (दीनदयाल) पत्तन: गुजरात में स्थित एक ज्वारीय पत्तन।

​मुंबई पत्तन: भारत का सबसे बड़ा और प्राकृतिक पत्तन (इसके भार को कम करने के लिए जवाहरलाल नेहरू पत्तन बनाया गया)।

​मार्गागोवा पत्तन: गोवा; देश के 50% लौह-अयस्क का निर्यात यहाँ से होता है।

​न्यू मैंगलोर पत्तन: कर्नाटक; कुद्रेमुख की खानों से लौह-अयस्क का निर्यात।

​कोच्ची पत्तन: केरल; लेगून के मुहाने पर प्राकृतिक पोताश्रय।

​तूतीकोरिन पत्तन: तमिलनाडु; प्राकृतिक बंदरगाह।

​चेन्नई पत्तन: भारत का प्राचीनतम कृत्रिम बंदरगाह।

​विशाखापटनम पत्तन: स्थल से घिरा सबसे गहरा व सुरक्षित पत्तन।

​पारादीप पत्तन: ओडिशा; लौह-अयस्क निर्यात।

​कोलकाता पत्तन: अंतःस्थलीय नदीय पत्तन (ज्वारीय)।

​हल्दिया पत्तन: कोलकाता पत्तन का सहायक बंदरगाह।

​5. वायु परिवहन

​इसका राष्ट्रीयकरण 1953 में किया गया।

​यह दुर्गम पर्वतों, घने जंगलों और मरुस्थलों को पार करने का सबसे तीव्र साधन है।

​पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटेड: तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) तथा दुर्गम क्षेत्रों (जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) को सेवाएँ देता है।

​6. संचार सेवाएँ

​भारतीय डाक संचार: विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है।

​प्रथम श्रेणी डाक: पत्र एवं बंद लिफाफा।

​द्वितीय श्रेणी डाक: किताबें, अखबार, मैगजीन।

​शीघ्र डाक के लिए 6 डाक मार्ग (राजधानी, मेट्रो, ग्रीन, व्यापार, भारी, दस्तावेज चैनल) बनाए गए हैं।

​भारत के दो-तिहाई गाँव STD सेवा से जुड़े हैं।

​फिल्म/सिनेमा: भारत विश्व में सर्वाधिक चलचित्रों का उत्पादक है। फिल्मों को प्रमाणित करने का अधिकार केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को है।

​7. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

​व्यापार: वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय व्यापार कहलाता है। दो देशों के बीच होने वाले व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं।

​अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को "राष्ट्र का बैरोमीटर" कहा जाता है।

​व्यापार संतुलन:

​अनुकूल व्यापार संतुलन: जब निर्यात का मूल्य, आयात के मूल्य से अधिक हो।

​असंतुलित (प्रतिकूल) व्यापार संतुलन: जब आयात का मूल्य, निर्यात से अधिक हो।

​भारत से प्रमुख निर्यात: रत्न, आभूषण, रसायन, कृषि उत्पाद।

​भारत में प्रमुख आयात: पेट्रोलियम, मशीनें, आधार धातु।

​8. पर्यटन एक व्यापार के रूप में

​भारत में लगभग 150 लाख (1.5 करोड़) लोग पर्यटन उद्योग में संलग्न हैं।

​पर्यटन राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारी संस्कृति और विरासत की समझ विकसित करता है।

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