परिवहन तथा संचार

                    अध्याय- VII  परिवहन तथा संचार

परिवहन के प्रकार - तीन

​स्थल परिवहन (सड़क, रेलवे, पाईप)

​जल परिवहन (अंतःस्थलीय, महासागरीय)

​वायु परिवहन (राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय)

​I. सड़क परिवहन

       ​सड़क मार्गों के माध्यम से होने वाले परिवहन को सड़क परिवहन कहा जाता है। भारत में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़कों का जाल है। 2020-21 के अनुसार भारत में 62.16 लाख कि.मी. लम्बी सड़कें हैं, जिनके द्वारा 85% यात्री व 70% वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। यह छोटी दूरी की यात्रा के लिए अनुकूल है।

​नागपुर में 1943 में पहली बार सड़क बनाने का प्रयास किया गया। आजादी के बाद 1961 में 20 वर्षीय सड़क विकास परियोजना बनाई गई।

निर्माण व रखरखाव के आधार पर भारतीय सड़कों को चार वर्गों में बांटा गया है:

i) राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)   ​ii) राज्य महामार्ग

​iii) जिला सड़कें              ​iv) ग्रामीण सड़कें

i) राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)         

                 ​वे सड़कें जिनके निर्माण व रख-रखाव की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की होती है, उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग कहा जाता है। इनका निर्माण अंतर्राज्यीय परिवहन, सामरिक क्षेत्र, रक्षा सामग्री तथा सेना के आवागमन के लिए किया जाता है। यह विभिन्न राज्यों की राजधानी, बन्दरगाह, रेलवे स्टेशन व प्रमुख नगरों को जोड़ती हैं। इनकी 1951 में लम्बाई 19,700 किमी. थी, जो 2020 में बढ़कर 1,36,440 किमी. हो गई। यह सड़कें देश की कुल सड़कों का 2% हैं, लेकिन परिवहन का 40% भार वहन करती हैं।

भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण (NHAI): 1995 में NHAI का गठन हुआ। यह परिवहन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी निकाय है, जिसको राष्ट्रीय महामार्गों के रख-रखाव की जिम्मेदारी दी गई है।

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना: यह देश के 4 बड़े महानगरों (दिल्ली - मुम्बई - चेन्नई - कोलकाता) को 4/6 लेन सड़क मार्गों से जोड़ने वाली परियोजना है। इसकी कुल लम्बाई 5,846 km है।

उत्तर-दक्षिण गलियारा: यह मार्ग J&K के श्रीनगर से आरम्भ होकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक जाता है। इसकी कुल लम्बाई 4,000 किमी. है।

​पूर्व-पश्चिम गलियारा: यह गलियारा असम के सिलचर से आरम्भ होकर गुजरात के पोरबन्दर तक जाता है। इसकी कुल लम्बाई 3,300 किमी. है।

​ii) राज्य महामार्ग

​वे सड़कें जिनके निर्माण व रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है, उन्हें राज्य महामार्ग कहते हैं। यह सड़कें राज्य की राजधानी, जिला मुख्यालयों व राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ती हैं। यह देश की सड़कों का 4% भाग हैं। इनकी कुल लम्बाई 1,76,818 किमी. है।

​iii) जिला सड़कें

​विभिन्न क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कें जिला सड़कें कहलाती हैं। यह सड़कें देश की कुल सड़कों का 14% भाग हैं।

​iv) ग्रामीण सड़कें

​ग्रामीण क्षेत्रों को आपस में जोड़ने वाली सड़कों को ग्रामीण सड़कें कहा जाता है। यह देश की कुल सड़कों का 80% भाग हैं।

​अन्य सड़कें

​इन सड़कों के अन्तर्गत सीमान्त सड़कें व अन्तर्राष्ट्रीय महामार्ग आते हैं।

​मई 1960 में भारत में सीमा सड़क संगठन (B.R.O.) का गठन किया गया, जिसके द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण व रख-रखाव किया जाता है। इसके अलावा चंडीगढ़ को मनाली (H.P.) व लेह से जोड़ने वाली सड़कें बनाई गईं।

नोट: विश्व की सबसे लम्बी राजमार्ग सुरंग अटल-टनल (9.02 किमी.) B.R.O. के द्वारा मनाली को लाहुल-स्पीति से जोड़ने के लिए बनाई गई। (समुद्र तल से 3,000 मीटर की ऊंचाई पर)

भारतमाला परियोजना:- 

​इस परियोजना का उद्देश्य तटीय राज्यों, सीमावर्ती क्षेत्रों व बन्दरगाहों को जोड़ना है।

​पिछड़े क्षेत्र, धार्मिक व पर्यटन स्थलों को जोड़ना।

​सेतु भारतम परियोजना: इसके तहत 1,500 बड़े पुल व 200 रेल अंडर/ओवर ब्रिज का निर्माण।

​10,000 किमी. के नए घोषित NH विकास के लिए जिला मुख्यालय से जोड़ना।

​2022 तक सभी प्रस्तावों को पूरा करना।


​(ii) रेल परिवहन:- 

​        भारतीय रेल विश्व के विकसित रेल तंत्रों में शामिल है। भारतीय रेल को लेकर गाँधी जी ने लिखा है कि "भारतीय रेलवे ने विविध संस्कृति के लोगों को एक साथ लाकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है।"

​         भारत में रेल परिवहन की शुरुआत 1853 में मुम्बई से ठाणे के बीच 34 km की दूरी पर चली। भारत में रेल परिवहन एक सार्वजनिक उद्योग है जिसकी कुल लंबाई 67956 किमी. है।

भारतीय रेल को 16 मण्डलों में विभाजित किया जाता है:





मेट्रो रेल मण्डल का मुख्यालय: कोलकाता

​पटरी की चौड़ाई के आधार पर रेलवे का वर्गीकरण:

​(i) बड़ी लाईन / ब्रॉडगेज: इसमें पटरियों के बीच की दूरी 1.676 m होती है। इनकी कुल लंबाई 63950 किमी. है।

(ii) मीटर लाईन: इसमें पटरियों के बीच की दूरी 1 m होती है। इसकी कुल लंबाई 2402 किमी. है।

​(iii) छोटी लाईन: इसमें पटरियों के बीच की दूरी 0.762 m / 0.610 m होती है। इसकी कुल लंबाई 1604 किमी. है।

​        भारत अपने रेलमार्गों को ब्रॉडगेज में बदल रहा है तथा वाष्प चालित इंजन के स्थान पर डीजल व विद्युत इंजन को लाया गया है।

​ब्रिटिश काल में रेलवे का विकास संसाधनों के शोषण हेतु किया गया।

कोंकण रेलवे: 1998 में MH के रोहा को मंगलोर (कर्नाटक) से जोड़ने के लिए 760 km मार्ग का विकास किया गया। यह मार्ग 146 नदी, 2000 पुल व 91 सुरंग को पार करता है।

​(iii) जल परिवहन

  • ​परिवहन का सबसे सस्ता साधन
  • ​भारी वस्तुओं के परिवहन के लिए उपयोगी
  • ​पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली
  • ​मार्गों के निर्माण की आवश्यकता नहीं

जल परिवहन के प्रकार (दो):

​1 अन्त: स्थलीय जलमार्ग       2        महासागरीय जलमार्ग

​1. अन्त: स्थलीय जलमार्ग

​सड़क व रेल परिवहन के विकास से पहले यह उत्तम मार्ग था। भारत में लगभग 14500 km जलमार्ग नौकायोग्य हैं, जिनके द्वारा कुल परिवहन का 1% वहन किया जाता है। वर्तमान में लगभग 5685 km लंबे नदी जलमार्ग परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाते हैं।

​भारत में जलमार्गों के विकास हेतु 1986 में अंत: स्थलीय जलमार्ग प्राधिकरण स्थापित किया गया, जिसके द्वारा अनेक जलमार्गों की पहचान की गई है। केरल के पश्च जल (कयाल) का जलमार्गों में महत्वपूर्ण योगदान है। यह पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहाँ नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ (वल्लामकाली) आयोजित की जाती है।

राष्ट्रीय जलमार्ग:

  1. रा. ज. मा.-1: इलाहाबाद से हल्दिया तक – 1620 km (गंगा नदी)
  2. ​रा. ज. मा.-2: सदिया से धुबरी तक – 891 km (ब्रह्मपुत्र नदी)
  3. ​रा. ज. मा.-3: कोट्टापुरम से कोल्लम तक – 168 km (उद्योगमंडल व चंपकारा नहर)
  4. ​रा. ज. मा.-4: काकीनाडा से पुदुचेरी – 1078 km (कृष्णा-गोदावरी नदी)
  5. ​रा. ज. मा.-5: मातई, महानदी व ब्राह्मणी नदी डेल्टा – 588 km

​2. महासागरीय जलमार्ग

​भारत के पास 7517 km लंबी समुद्री तटरेखा है, जिस पर 12 बड़े व 185 छोटे बंदरगाह स्थित हैं। जो भार के अनुसार 95% एवं मूल्य के अनुसार 70% विदेशी व्यापार में योगदान देते हैं।

वायु परिवहन

              ​यह परिवहन का तीव्रतम साधन है। यह यात्रा के समय को घटाकर दूरी को कम करता है। भारत में सर्वप्रथम 1911 में इलाहाबाद से नैनी के बीच 10 km की दूरी हेतु डाक प्रचलन के लिए वायु परिवहन की शुरुआत हुई। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India) के द्वारा भारत में वायु परिवहन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है।

पवन हंस परिसेवा: इस सेवा के तहत उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में व पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से वायु परिवहन की सुविधा उपलब्ध करवायी जाती है।

​वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण: 1953 में।

तेल एवं गैस पाइपलाइन परिवहन:- 

​                         लंबी दूरी तक तरल पदार्थों के परिवहन हेतु पाइपलाइन परिवहन सबसे सुविधाजनक परिवहन माना जाता है। इसके द्वारा ठोस पदार्थों को भी घोल / गारा (Slurry) के रूप में बदलकर परिवहन किया जा सकता है।

​             पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के द्वारा ऑयल इण्डिया लि. (OIL) की स्थापना की गई, जिसका मुख्य कार्य कच्चा तेल व प्राकृतिक गैस की खोज, उत्पादन व परिवहन करना है। OIL के द्वारा असम के नाहरकटिया से बरौनी (बिहार) तक एशिया की सबसे लंबी पाइपलाइन (1157 km) बनाई गई, जिसे 1966 में बढ़ाकर कानपुर तक किया गया।

​               प्राकृतिक गैस के परिवहन, प्रसंस्करण व आर्थिक उपयोग के लिए 1984 में GAIL (गेल) की स्थापना की गई। गेल के द्वारा हजीरा (गुजरात) - विजयपुर (M.P.) - जगदीशपुर (U.P.) क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन मुम्बई हाई व बसीन को उत्तरी भारत से जोड़ने के लिए 1700 km लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण किया गया।

संचार ​:-

​         सूचनाओं, विचारों व संदेशों के आदान-प्रदान को संचार कहा जाता है। आरंभ में ढोल / पशु-पक्षियों के द्वारा सूचनाएं पहुंचायी जाती थीं, लेकिन वर्तमान में उपग्रह संचार प्रणाली के विकास के कारण T.V., रेडियो, मोबाइल आदि के द्वारा सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है।

संचार के साधनों को निम्न दो भागों में बाँटा जा सकता है:

​1व्यक्तिगत संचार तंत्र  2सार्वजनिक संचार तंत्र(जन संचार)

1. व्यक्तिगत संचार तंत्र:

​यह वर्तमान में सबसे प्रभावी व लोकप्रिय संचार है। इसके द्वारा व्यक्ति इंटरनेट की सहायता से ई-मेल, टेलीग्राम आदि के माध्यम से तीव्र गति से सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है।

2. सार्वजनिक संचार तंत्र (जन संचार क्षेत्र):

(i) रेडियो: भारत में सबसे पहले रेडियो का प्रसारण 1923 में रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे के द्वारा किया गया था। उस समय यह लोकप्रिय संचार का माध्यम था। 1930 में सरकार ने 'इंडियन ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम' के अंतर्गत इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। 1936 में इसे 'ऑल इण्डिया रेडियो' व 1957 में इसे 'आकाशवाणी' में बदला गया। यह सूचना, समाचार, शिक्षा व मनोरंजन आदि कार्यक्रमों का प्रसारण करता है।

​(ii) टेलीविजन (T.V.): सूचनाओं के प्रसारण में T.V. एक लोकप्रिय दृश्य-श्रव्य माध्यम है। भारत में T.V. का प्रसारण 1959 में केवल राजधानी क्षेत्रों तक सीमित था। 1972 में इसके अनेक केंद्र प्रारंभ हुए। 1976 में इसे ऑल इण्डिया रेडियो से अलग करके दूरदर्शन के रूप में विकसित किया। INSAT-1A के प्रारंभ के बाद T.V. पर राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रारंभ किए गए।

​(iii) उपग्रह संचार: यह एक संचार का माध्यम है जो अन्य साधनों को संचालित करता है। इसका उपयोग संचार के साथ-साथ सामरिक व आर्थिक कारणों से भी किया जाता है। यह मौसम के पूर्वानुमान, सीमा सुरक्षा व प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी भी देता है। इसे समाकृति व उद्देश्यों के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है:

इण्डियन नेशनल सेटेलाइट सिस्टम (INSAT)

​इण्डियन रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट सिस्टम (IRS)

INSAT: इसकी स्थापना 1983 में हुई थी। यह बहुउद्देश्यीय उपग्रह प्रणाली है जो दूरसंचार, मौसम विज्ञान आदि के आंकड़े प्रदान करती है।

IRS: यह उपग्रह प्रणाली मार्च 1988 में बैकानूर से प्रारंभ हुई। भारत ने अपना I.R.S. प्रक्षेपण P.S.L.V. (पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल) विकसित किया। ये उपग्रह वर्णक्रमीय (स्पेक्ट्रल) बैंड को एकत्रित करते हैं तथा विभिन्न भू-स्टेशनों पर सम्प्रेषित करते हैं। भारत में हैदराबाद में स्थित 'नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर' (NRSC) आंकड़ों के अधिग्रहण व प्रक्रमण की सुविधा उपलब्ध करवाता है।

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